हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
विरोध-प्रदर्शनों के बीच मीडिया कवरेज पर उठे सवाल, जानिए क्या है यलो जर्नलिज्म और कैसे पड़ा इसका नाम।
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच मीडिया की भूमिका को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समाचार मंच अलजजीरा की रिपोर्टिंग की आलोचना करते हुए उस पर “यलो जर्नलिज्म” का आरोप लगाया है। साथ ही ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि कई डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स की पहुंच सीमित की गई है, हालांकि पाकिस्तान सरकार ने किसी औपचारिक प्रतिबंध की पुष्टि नहीं की है।
मंत्रालय का आरोप है कि अलजजीरा ने मुजफ्फराबाद के कुछ चुनिंदा मतदान केंद्रों और सीमित स्रोतों के आधार पर चुनाव प्रक्रिया की भ्रामक तस्वीर पेश की। दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय समूहों का दावा है कि PoJK में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
क्या है यलो जर्नलिज्म?
यलो जर्नलिज्म पत्रकारिता की वह शैली है, जिसमें तथ्यों की निष्पक्ष और संतुलित प्रस्तुति के बजाय सनसनी, भावनात्मक प्रभाव और पाठकों का ध्यान आकर्षित करने पर अधिक जोर दिया जाता है। इसमें खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने या अधूरी जानकारी के आधार पर प्रभाव पैदा करने की आशंका रहती है। पत्रकारिता के मानकों में इसे नकारात्मक प्रवृत्ति माना जाता है।
कहां से आया यह शब्द?
“यलो जर्नलिज्म” शब्द की शुरुआत 1890 के दशक में अमेरिका से हुई। उस समय जोसेफ पुलित्जर और विलियम रैंडोल्फ हर्स्ट के अखबारों के बीच सर्कुलेशन बढ़ाने की होड़ थी। दोनों अखबारों में प्रकाशित लोकप्रिय कॉमिक पात्र “यलो किड” के नाम पर इस शैली को “यलो जर्नलिज्म” कहा जाने लगा। 1898 के स्पेन-अमेरिका युद्ध के दौरान भी इस तरह की सनसनीखेज रिपोर्टिंग की व्यापक चर्चा हुई थी।
PoJK में बढ़ता विवाद
मानवाधिकार संगठन HRC-PoJK के अनुसार, हालिया हिंसा में अब तक 80 लोगों की मौत होने का दावा किया गया है, जिनमें चार पुलिसकर्मी भी शामिल बताए गए हैं। वहीं, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने एक वीडियो जारी कर सुरक्षाबलों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग और गोलीबारी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।



















