हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
समय पर इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस, ब्याज और वित्तीय परेशानियों से बचाव, लोन-वीजा प्रक्रिया भी होगी आसान
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयकर विभाग सभी प्रमुख ITR फॉर्म जारी कर चुका है, लेकिन हर साल की तरह बड़ी संख्या में करदाता अंतिम तारीख का इंतजार करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आखिरी समय में रिटर्न दाखिल करने से तकनीकी समस्याएं, दस्तावेजों की कमी और जानकारी भरने में त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में समय रहते ITR फाइल करना अधिक सुरक्षित और लाभदायक विकल्प है।
समय पर रिटर्न दाखिल करने से बचेंगे अतिरिक्त खर्च
यदि कोई करदाता निर्धारित समय सीमा के बाद ITR दाखिल करता है, तो उसे विलंबित (Belated) रिटर्न दाखिल करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में आयकर अधिनियम की धारा 234A के तहत बकाया टैक्स पर प्रति माह 1 प्रतिशत की दर से ब्याज देना पड़ सकता है। वहीं धारा 234F के अनुसार कुल आय 5 लाख रुपये से अधिक होने पर 5,000 रुपये और 5 लाख रुपये तक की आय पर 1,000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है।
कैपिटल लॉस का लाभ भी छूट सकता है
यदि किसी निवेशक को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या कारोबार में नुकसान हुआ है, तो वह इस नुकसान को भविष्य के वर्षों में समायोजित कर टैक्स बचा सकता है। हालांकि यह सुविधा केवल उन्हीं करदाताओं को मिलती है, जो निर्धारित समय सीमा के भीतर ITR दाखिल करते हैं। देरी होने पर कैपिटल लॉस या बिजनेस लॉस को आगे के वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने का लाभ नहीं मिलेगा।
लोन और वीजा में भी होती है ITR की अहम भूमिका
ITR आपकी आय और वित्तीय अनुशासन का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। बैंक होम लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन या क्रेडिट कार्ड जारी करने से पहले पिछले वर्षों की ITR मांगते हैं। इसके अलावा कई देशों के वीजा आवेदन में भी ITR आय के प्रमाण के रूप में जरूरी होती है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से भविष्य में किसी भी वित्तीय या यात्रा संबंधी प्रक्रिया में परेशानी नहीं होती।
महत्वपूर्ण तिथियां
- ITR-1 और ITR-2 (वेतनभोगी, पेंशनभोगी): 31 जुलाई 2026
- ITR-3 और ITR-4 (नॉन-ऑडिट): 31 अगस्त 2026
- टैक्स ऑडिट वाले मामले: 31 अक्टूबर 2026
- बिलेटेड ITR की अंतिम तिथि: 31 दिसंबर 2026













