हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 4 मई : 2025,
कानपुर |
उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग में बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें करीब 600 करोड़ रुपये के टर्नओवर को छिपाकर 165 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई है। इस मामले में विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारी शक के घेरे में आ गए हैं। इनमें एक अपर आयुक्त, एक संयुक्त आयुक्त, और दो उपायुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
यह घोटाला कानपुर की एक मसाला और तंबाकू निर्माता फर्म से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच राज्य कर विभाग की विशेष जांच शाखा द्वारा कराई गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि फर्म की आठ उत्पादन मशीनों की वास्तविक क्षमता को जानबूझकर कम करके दिखाया गया, जिससे उत्पादन और टर्नओवर दोनों को कम आंककर कर चोरी की गई।
कैसे की गई टैक्स चोरी?
जांच में यह सामने आया कि:
- एक मशीन की क्षमता 2000 पाउच प्रति मिनट थी।
- विभागीय गणना में मानक 1000 पाउच प्रति मिनट मानी जाती है।
- लेकिन जांच में इसे मात्र 400 पाउच प्रति मिनट दिखाया गया।
- साथ ही, आठ मशीनों के स्थान पर केवल एक मशीन की रिपोर्ट बनाई गई।
इस गड़बड़ी के आधार पर फर्म का कुल उत्पादन बड़ी मात्रा में कम दर्शाया गया, जिससे अनुमानतः 600 करोड़ रुपये के टर्नओवर को छिपाया गया और लगभग 165 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की गई।
जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की संस्तुति
जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित निर्धारण अधिकारी ने कर निर्धारण आदेश पारित कर दिया। इसके बाद अपर आयुक्त (ग्रेड-1) ने चार अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी करने की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी।
लेकिन, हैरानी की बात यह रही कि चार्जशीट की संस्तुति करने वाले अपर आयुक्त को ही उनकी मूल तैनाती से हटाकर मुख्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या उच्चाधिकारियों पर कार्रवाई के बदले जांच अधिकारी को ही निशाना बनाया जा रहा है?
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे मामले पर शासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन विभागीय सूत्रों का कहना है कि शासन स्तर पर जांच रिपोर्ट की समीक्षा चल रही है और जल्द ही औपचारिक कार्रवाई की संभावना है।

















