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आईएएस रिंकू सिंह राही की 6 पन्नों की चिट्ठी में सरकारी व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल, पढ़ें चिट्ठी में क्या लिखा

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :

डीएम के कामकाज, अवैध कब्जों की कार्रवाई, फर्जी निस्तारण और आधे वेतन की मांग को लेकर शासन को लिखा विस्तृत पत्र

उत्तर प्रदेश के जालौन में एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही की छह पन्नों की चिट्ठी ने प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। हाल ही में इस्तीफा देने की पेशकश के बाद अब उन्होंने शासन को भेजे पत्र में सरकारी कार्यप्रणाली, प्रशासनिक दबाव और कार्य संस्कृति को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में उन्होंने न केवल अपनी कार्य परिस्थितियों का उल्लेख किया है, बल्कि व्यवस्था में व्याप्त खामियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है।

रिंकू सिंह ने पत्र में लिखा है कि आम जनता के हित और सरकारी कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्होंने कई बार अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं और अंतरात्मा के विपरीत व्यावहारिक संतुलन बनाने का प्रयास किया। उनके अनुसार, एक बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विधायक गौरी शंकर वर्मा की मौजूदगी में तहसील क्षेत्र में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामलों में कार्रवाई न करने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि इस आदेश का पूरी तरह पालन करने के बजाय उन्होंने केवल प्राप्त शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई शुरू की, जिसके बाद शिकायतों की संख्या बढ़ने लगी और कई मामलों में कथित रूप से फर्जी निस्तारण होने लगा।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनपद की रैंकिंग बेहतर बनाए रखने के लिए आईजीआरएस और एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज मामलों के फर्जी निस्तारण को स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने वैकल्पिक समाधान सुझाने का प्रयास किया, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया।

आईएएस अधिकारी ने यह भी लिखा कि कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम का हवाला देकर अवैध कब्जे की जांच को लेकर विवाद खड़ा किया गया, जिसके बाद उनका तबादला कर दिया गया। उनका कहना है कि यदि ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारी को ऐसे परिणाम भुगतने पड़ते हैं तो अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

रिंकू सिंह ने अपने पत्र में “काम नहीं तो वेतन नहीं” की अवधारणा का भी उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि एसडीएम न्यायिक के रूप में उन्हें न्यायालय में प्रतिदिन लगभग दो घंटे और फाइलों व कानूनी कार्यों में चार घंटे का समय देना पड़ता है। ऐसे में यदि आठ घंटे का कार्यदिवस माना जाए तो वह लगभग आधा कार्य ही कर पा रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने 22 जुलाई 2026 से अंतिम निर्णय होने तक आधा वेतन दिए जाने का अनुरोध किया है।

उन्होंने जिलाधिकारी के जनता दर्शन कार्यक्रम पर भी सवाल उठाते हुए लिखा कि वहां शिकायतों के प्रभावी समाधान के बजाय केवल औपचारिकता निभाई जाती है, जिससे उनके अंतर्मन को ठेस पहुंचती है। पत्र के अंत में उन्होंने मांग की है कि यदि उनसे कोई त्रुटि हुई है तो नियमानुसार दंड दिया जाए, अन्यथा उन्हें किसी तहसील में नियमित एसडीएम के रूप में कार्य करने का अवसर दिया जाए। यदि यह संभव न हो तो उनका कैडर परिवर्तन करने पर विचार किया जाए।

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1 Comments Text
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