हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
संसद में सरकार ने किया स्पष्ट, E20 ईंधन सुरक्षित और बेहतर तकनीक; किसानों, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को गिनाए बड़े फायदे
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट कर दिया है कि देश में अब बिना एथेनॉल वाला (E0) या 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित (E10) पेट्रोल दोबारा लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) सुरक्षित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से उन्नत ईंधन है तथा सरकार की नीति इसी दिशा में आगे बढ़ने की है।
सरकार के अनुसार भारत ने निर्धारित समय से करीब पांच वर्ष पहले ही 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है। वर्ष 2022-23 में औसत एथेनॉल मिश्रण लगभग 12 प्रतिशत था, जो 2023-24 में 14.6 प्रतिशत, 2024-25 में 19.2 प्रतिशत और 2025-26 में 20 प्रतिशत तक पहुंच गया। फिलहाल E20 से अधिक ब्लेंडिंग पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं E85 ईंधन केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए ही उपलब्ध रहेगा।
सरकार ने सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने और माइलेज घटने संबंधी दावों को भी खारिज किया। संसद में बताया गया कि नीति आयोग, इंडियन ऑयल, एआरएआई, आईआईपी और सियाम द्वारा किए गए परीक्षणों तथा वास्तविक उपयोग के आंकड़ों में E20 से इंजन को किसी असामान्य नुकसान का कोई प्रमाण नहीं मिला। एक प्रमुख वाहन निर्माता द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग के दौरान भी एथेनॉल के कारण इंजन खराब होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।
माइलेज को लेकर सरकार ने कहा कि पुराने E10 आधारित वाहनों में अधिकतम 3 से 5 प्रतिशत तक मामूली कमी आ सकती है, लेकिन E20 का ऑक्टेन स्तर अधिक होने से वाहन का पिक-अप, राइड क्वालिटी और इंजन प्रदर्शन बेहतर होता है।
सरकार ने बताया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बची है, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन घटा है और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए तेल विपणन कंपनियों ने हेल्पलाइन, वेबसाइट, मोबाइल ऐप और CPGRAMS सहित कई माध्यम उपलब्ध कराए हैं।














