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आवास विकास: अब मकानों में खोल सकेंगे दुकान-दफ्तर, नई उपविधियों को मंजूरी

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज

घर के भीतर दुकान, दफ्तर, क्लीनिक, नर्सरी, क्रेच, होम स्टे, वकालत, आर्किटेक्ट, सीए आदि की गतिविधियों को अनुमति मिल सकेगी। इससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी और मकानों का बहुउद्देशीय उपयोग संभव होगा

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने अपने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए भवन निर्माण की नई उपविधियों को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को हुई बोर्ड बैठक में परिषद के सचिव नीरज शुक्ला ने इस बाबत विस्तृत जानकारी देते हुए बताया

नक्शा पास कराना अब आसान

नई उपविधियों के तहत अब 100 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर आवासीय निर्माण और 30 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ एक रुपये की फीस लेकर पंजीकरण कराया जाएगा। वहीं 500 वर्गमीटर तक आवासीय भवन और 200 वर्गमीटर तक व्यावसायिक भवन के लिए नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा।

सड़क की चौड़ाई के अनुसार गतिविधियों की मंजूरी

अब फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) बढ़ाया जा सकेगा, लेकिन भवन की ऊंचाई पर प्रतिबंध रहेगा।

  • 9 मीटर चौड़ी सड़क पर प्राथमिक विद्यालय और बिना शैय्या वाले अस्पताल खोले जा सकेंगे।
  • 18 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़क पर शॉपिंग मॉल का निर्माण भी संभव होगा।
  • 24 मीटर चौड़ी सड़क पर अधिवक्ता कार्यालय और अन्य सेवाओं को भी मंजूरी मिलेगी।

विभागीय अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) अगर निर्धारित समय पर नहीं दिए गए, तो भी नक्शा स्वीकृत मान लिया जाएगा।

शमन मानचित्र से मिलेगी राहत

पुराने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों को अब शमन मानचित्र के जरिए राहत दी जाएगी। इससे कई ऐसे भवन मालिकों को लाभ होगा, जिनके पास पूर्व से बने घरों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।


नई आवासीय योजनाएं: बांदा और चित्रकूट में तेजी

परिषद अब नए क्षेत्रों में आवासीय योजनाएं शुरू कर रहा है। बांदा के मवई बुजुर्ग गांव में लगभग 338 एकड़ जमीन पर नई योजना लाई जाएगी जिसमें 9500 से अधिक भूखंड विकसित किए जाएंगे। वहीं चित्रकूट में ग्राम चकला राजरानी और अहमदगंज की करीब 160 एकड़ भूमि पर आवासीय योजना प्रस्तावित है, जिसमें 4000 भूखंड बनेंगे। दोनों योजनाओं को एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।

अवैध निर्माण पर सख्ती

परिषद ने पुराने मामलों की जांच में दोषी पाए गए सेवानिवृत्त अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रयागराज में तैनात रहे जेई नारायण प्रसाद ने 2017 में बिना कटौती के 41 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान ठेकेदार को दिया था। वहीं गाजियाबाद में अधिशासी अभियंता सुनील कुमार सिंह और जेई दिनेश पाल सिंह ने अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया। अब इन सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

11 हजार फ्लैटों की बिक्री सितंबर से

आवास विकास परिषद प्रदेशभर में खाली पड़े करीब 11 हजार फ्लैटों की बिक्री के लिए सितंबर में पंजीकरण खोलेगा। लखनऊ की अवध विहार, वृंदावन और मुन्नूखेड़ा योजनाओं में 2500 फ्लैट शामिल हैं। लखनऊ को छोड़ अन्य शहरों में 40% तक की छूट दी जाएगी। हालांकि लखनऊ में एकमुश्त भुगतान करने वालों को 5% की रियायत दी जाएगी।


इस नई व्यवस्था से न सिर्फ आमजन को राहत मिलेगी, बल्कि आवास विकास परिषद की योजनाओं में भी तेजी आएगी और उपयोगिता बढ़ेगी।

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