हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 6 मई : 2025,
अलीगढ़, 6 मई:
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एडवांस्ड सेंटर फॉर विमेंस स्टडीज की छात्राओं ने विमेंस स्टडीज फोरम का औपचारिक उद्घाटन किया। यह छात्राओं द्वारा संचालित मंच अकादमिक शोध और सामाजिक सक्रियता को जोड़ते हुए लैंगिक न्याय, समावेशिता और नेतृत्व विकास को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
छात्राओं की पहल को प्रोफेसरों ने सराहा
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि, अंग्रेजी विभाग की प्रो. समीना खान ने इस पहल को संस्थागत बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कैंपस में स्वतंत्र शिकायत निवारण समिति की स्थापना की आवश्यकता जताई और पीओएसएच अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने की बात कही।
मानद अतिथि और जनसंपर्क कार्यालय की प्रभारी प्रो. विभा शर्मा ने समावेशी माहौल के निर्माण, अवचेतन पूर्वाग्रहों को खत्म करने और इंटरसेक्शनल दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। उन्होंने गहराई से सुनने और अनावश्यक बातों को पीछे छोड़ने जैसे कौशलों को भी समानता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

शोध, सामाजिक सहभागिता और व्यवहारिक बदलाव पर ज़ोर
फैकल्टी ऑफ लॉ के डॉ. शहाब शब्बीर ने अनुभव आधारित शिक्षा और रचनात्मक भागीदारी की अहमियत बताते हुए एआई टूल्स पर अंधनिर्भरता से सावधान किया। वहीं, अंग्रेजी विभाग की डॉ. सदफ फरीद ने केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि उसे व्यवहार में लाने पर ज़ोर देते हुए छात्रों से सामाजिक सहारा देने की अपील की।
मंच का उद्देश्य और भविष्य की कार्ययोजना
फोरम की सेक्रेटरी कायनात ने फोरम की सोच, उद्देश्य और कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रस्तुत की गई प्रेजेंटेशन में छह महीने की योजना साझा की गई, जो सतत विकास लक्ष्य 5 (लैंगिक समानता) के अनुरूप तैयार की गई है।
इस कार्ययोजना में शामिल हैं:
- हाशिए पर मौजूद जेंडर कहानियों पर विरासत यात्राएं
- छात्राओं द्वारा संचालित जेंडर स्टडीज पत्रिका का प्रकाशन
- गुड टच-बैड टच पर कार्यशालाएं और संसाधन किट वितरण
- स्थानीय महिला उद्यमियों के लिए क्षमता निर्माण शिविर
- शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना
- मानसिक स्वास्थ्य अभियान और लॉ फैकल्टी के साथ मिलकर संगोष्ठियों का आयोजन
नेतृत्व और आलोचनात्मक विमर्श को मिलेगा प्रोत्साहन
एडवांस्ड सेंटर फॉर विमेंस स्टडीज की निदेशक प्रो. अज़रा मुसवी और फैकल्टी एडवाइजर डॉ. तरुशिखा सर्वेश ने छात्राओं को इस पहल के लिए बधाई दी और मंच की निरंतर सक्रियता की अपील की।
डॉ. तौसीफ और डॉ. शीराज़ अहमद सहित कई शिक्षकों ने भी मंच के उद्देश्यों का समर्थन करते हुए इसे छात्र नेतृत्व और सामाजिक चेतना की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताया।

















