हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 30 अप्रैल: 2025,
अलीगढ़, 30 अप्रैल:
अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन (उत्तर प्रदेश शाखा) और अमराजे जिल्द वा जोहराविया विभाग, अजमल खान तिब्बिया कॉलेज, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष मेडिटॉक कम एक्सटेंशन लेक्चर का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान का मुख्य विषय था — “समकालीन संदर्भ में यूनानी संस्थानों के लिए चुनौतियाँ और समाधान।”
कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बिया कॉलेज, करोल बाग, नई दिल्ली से पधारे प्रख्यात यूनानी विद्वान प्रोफेसर शब्बीर अहमद ने शिरकत की। उन्होंने समकालीन समय में यूनानी चिकित्सा शिक्षा संस्थानों के समक्ष खड़ी प्रमुख चुनौतियों जैसे कि पाठ्यक्रम में नवीनता की कमी, चिकित्सीय पद्धतियों में बदलाव और शोध अधोसंरचना की सीमाओं पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।
प्रो. अहमद ने इन समस्याओं से निपटने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए, जिनमें अकादमिक पाठ्यक्रमों को अद्यतन करना, चिकित्सकों के लिए सतत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, और शोध कार्यों को प्रोत्साहन देने हेतु सहयोगी ढांचे विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम में विभाग के शिक्षक, पोस्टग्रेजुएट छात्र तथा यूनानी चिकित्सक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सेमिनार हॉल (स्किल लैब) में हुए इस आयोजन के दौरान श्रोताओं ने यूनानी चिकित्सा के समकालीन परिप्रेक्ष्य में चल रहे विमर्श में गहरी रुचि दिखाई।
इस अवसर पर डॉ. मोहम्मद मोहनसिन, सचिव (उत्तर प्रदेश शाखा) अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन एवं विभागाध्यक्ष (अमराजे जिल्द वा जोहराविया विभाग) ने प्रो. अहमद का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यूनानी चिकित्सा पद्धति की आधुनिक स्वास्थ्य परिदृश्य में प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए निरंतर अकादमिक और चिकित्सीय संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाने के लिए अजमल खान तिब्बिया कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर बी.डी. खान भी उपस्थित रहे।














