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मानसून सत्र में आ सकता है नया न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा आश्वासन

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :

रिक्त पदों, नियुक्ति प्रक्रिया और ट्रिब्यूनलों के कामकाज में सुधार की तैयारी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नया न्यायाधिकरण सुधार विधेयक (Tribunal Reforms Bill) अंतिम मसौदा चरण में है और इसे संसद के मौजूदा मानसून सत्र में पेश करने का प्रयास किया जाएगा। यह जानकारी मंगलवार को अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दी।

मामला देशभर के विभिन्न न्यायाधिकरणों में बड़ी संख्या में रिक्त पदों और उनके कामकाज से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि न्यायाधिकरण न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें निष्क्रिय या कमजोर नहीं होने दिया जा सकता। अदालत ने केंद्र से ट्रिब्यूनलों के संचालन, नियुक्तियों और प्रशासन के लिए एक समान एवं प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

पहले भी रद्द हो चुके हैं नियुक्ति संबंधी प्रावधान

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने संकेत दिया कि प्रस्तावित विधेयक फिलहाल मानसून सत्र के आधिकारिक एजेंडे में शामिल नहीं है। इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार इसे इस सत्र में लाने का पूरा प्रयास करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि नवंबर 2025 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 के उन प्रावधानों को रद्द कर दिया था, जो न्यायाधिकरणों के सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल से संबंधित थे। अदालत ने माना था कि ये प्रावधान उसके पूर्व के निर्णयों की भावना के विपरीत हैं और सरकार ने पहले निरस्त नियमों को मामूली बदलावों के साथ दोबारा लागू करने की कोशिश की थी।

राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग पर कोर्ट का जोर

सुप्रीम कोर्ट ने पहले केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन गठित करने का निर्देश भी दिया था। अदालत का मानना है कि यह आयोग नियुक्तियों, प्रशासन और न्यायाधिकरणों के कामकाज में स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संस्थागत व्यवस्था होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल छोटे-मोटे सुधारों से वर्षों से चली आ रही व्यवस्थागत कमियों को दूर नहीं किया जा सकता, इसलिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।

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