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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हिंदी के प्रति लगाव

अर्पणा सिंह,
सहायक आचार्य,
हिंदी विभाग,
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, उत्तराखंड

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं। उनका जीवन और कार्य, विशेषकर हिंदी भाषा के प्रति उनका अटूट लगाव, हम सभी के लिए एक प्रेरणा है। इस विशेष दिन पर, हम उनके इस लगाव की गहराई और इसके बहुआयामी प्रभावों का विश्लेषण करते हुए यह आलेख उन्हें एक विनम्र भेंट के रूप में समर्पित करते हैं।

  1. हिंदी: केवल एक भाषा नहीं, एक भावनात्मक जुड़ाव
    नरेंद्र मोदी का हिंदी के प्रति लगाव केवल एक औपचारिक राजभाषा के रूप में नहीं है, बल्कि यह एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है। वे हिंदी को देश की आत्मा और पहचान मानते हैं। यह लगाव उनके हर कार्य में परिलक्षित होता है, चाहे वह जनता से संवाद हो, विदेशी दौरे हों, या ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम हों। हिंदी उनके लिए सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि विचारों, भावनाओं और संस्कृति को व्यक्त करने का माध्यम है। उनका यह प्रयास हिंदी को सरकारी दीवारों से निकालकर जन-जन की भाषा बनाने का है।
  2. वैश्विक मंच पर हिंदी का मान
    प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी को विश्व के सबसे बड़े मंचों पर सम्मान दिलाया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में उनका हिंदी में संबोधन एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपनी भाषा पर गर्व करता है। उन्होंने कई विदेशी राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत में भी हिंदी का प्रयोग किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भाषा किसी भी राष्ट्र के गौरव का प्रतीक होती है। उनके प्रयासों से हिंदी को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान मिली है, जो युवा पीढ़ी को अपनी भाषा पर गर्व करने के लिए प्रेरित करती है।
  3. ‘मन की बात’ और जन-जन से संवाद
    प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ ने हिंदी को एक नए स्तर पर पहुंचाया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से वे देश के कोने-कोने में हिंदी में सीधे लोगों से जुड़ते हैं। यह दिखाता है कि हिंदी केवल बड़े-बड़े भाषणों की भाषा नहीं, बल्कि एक ऐसी भाषा है जो आम नागरिक के जीवन से जुड़ी है। इस कार्यक्रम में उनके द्वारा प्रयोग की जाने वाली सरल, सुगम और प्रेरणादायक भाषा हिंदी की शक्ति और पहुंच को दर्शाती है।
  4. डिजिटल युग में हिंदी को प्रोत्साहन
    डिजिटल इंडिया के इस दौर में, प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदी में संवाद को प्राथमिकता दी है, जिससे डिजिटल दुनिया में हिंदी का उपयोग बढ़ा है। उनके प्रयासों से सरकारी वेबसाइटों, ऐप्स और ऑनलाइन सामग्री में हिंदी को स्थान मिला है, जिससे हिंदी भाषियों के लिए डिजिटल पहुंच आसान हुई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हिंदी के प्रति लगाव केवल एक राजनीतिक नीति नहीं, बल्कि एक सच्चे दिल से किया गया प्रयास है। यह उनके ‘योग दर्शन’ और ‘युग पुरुष’ के रूप में उनकी पहचान को दर्शाता है, जो अपनी जड़ों से जुड़े हैं और उन्हें मजबूत करना जानते हैं। उनके अथक प्रयासों के कारण हिंदी आज केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सभ्यता और दिल की धड़कन बन गई है।
    प्रधानमंत्री जी को जन्मदिन की पुनः ढेरों शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे इसी तरह देश का मार्गदर्शन करते रहें और हिंदी को और भी ऊंचाइयों पर ले जाते रहें।

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