हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 2 मई : 2025,
नई व्यवस्था के तहत अब भारतीय रेलवे के टिकट दलालों पर कार्रवाई करने का अधिकार रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) से छीनकर भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) को सौंप दिया गया है। इसके बाद से आरपीएफ अब टिकट दलालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगी और यह जिम्मेदारी पूरी तरह से आईआरसीटीसी के पास होगी।
कौन करेगा कार्रवाई?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टिकट दलालों पर कार्रवाई अब आईआरसीटीसी के अधिकृत एजेंटों द्वारा की जाएगी। आरपीएफ, जो पहले टिकट दलालों को पकड़ने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए जिम्मेदार थी, अब सिर्फ एजेंटों को आईआरसीटीसी के पास सौंपेगी। आईआरसीटीसी ही अब कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होगी और अधिकतम कार्रवाई एजेंट का लाइसेंस रद्द करने तक सीमित होगी।
क्या है टिकट दलाली का तरीका?
आईआरसीटीसी के एजेंट फर्जी आईडी और प्रतिबंधित सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल कर तत्काल कोटे के टिकटों को बुक कर लेते हैं। इस सॉफ़्टवेयर की मदद से एक बार में 10 से 12 टिकट बुक किए जा सकते हैं। यह एजेंट मनमाने रेट पर इन टिकटों को यात्रियों को बेचते हैं।
वसूली कितनी होती है?
टीसीकेट दलाल टिकटों के रेट के अलावा यात्रियों से अतिरिक्त वसूली करते हैं।
- स्लीपर क्लास: 500 – 800 रुपये
- थर्ड एसी: 1000 – 1200 रुपये
- सेकेंड एसी: 1200 – 1500 रुपये
- फर्स्ट एसी: 1500 – 2000 रुपये
- चेयरकार: 1500 – 1800 रुपये
वर्तमान में कितनी कार्रवाई हुई है?
आरपीएफ द्वारा 2022 से 2025 तक की अवधि में बड़े पैमाने पर टिकट दलालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। 2022 में उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे में कुल 526 और 230 मामले दर्ज किए गए, वहीं 2025 में ये आंकड़े घटकर 17 और 4 रह गए हैं।
क्या होंगे नए चुनौतीपूर्ण तरीके?
आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि अब दलालों पर नियंत्रण रखने के लिए नए तरीके अपनाए जाएंगे। हालांकि, इस बदलाव से नई चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं क्योंकि एजेंट जल्दी ही नए नाम और पते पर लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं, और फिर से दलाली शुरू कर सकते हैं।

















