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पद्म श्री से सम्मानित सिलंबम गुरु के. पजानिवेल ने पीएम मोदी को किया साष्टांग प्रणाम, चर्चा में आया भावुक पल

नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान एक भावुक और अनोखा दृश्य देखने को मिला, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पुडुचेरी के प्रसिद्ध सिलंबम गुरु के. पजानिवेल को जब पद्म श्री सम्मान ग्रहण करने के लिए मंच पर बुलाया गया, तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साष्टांग प्रणाम किया। इस अप्रत्याशित पल को देखकर प्रधानमंत्री तुरंत आगे बढ़े और उन्हें उठाकर हाथ थाम लिया। इसके बाद पजानिवेल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास पहुंचे और सम्मान ग्रहण किया।

चार दशक से तमिल विरासत के संरक्षण में योगदान

के. पजानिवेल का जन्म 30 जनवरी 1973 को पुडुचेरी के पूरनंकुप्पम में हुआ था। उन्होंने सिलंबम कला की शिक्षा मास्टर राजाराम के मार्गदर्शन में शुरू की थी। पिछले चार दशकों से अधिक समय से वह इस प्राचीन तमिल युद्ध कला के संरक्षण, प्रचार और प्रसार के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सिलंबम का प्रदर्शन कर इसकी पहचान को मजबूत किया है।

निशुल्क प्रशिक्षण देकर तैयार किए कई छात्र

पजानिवेल ने अनेक विद्यार्थियों को निशुल्क प्रशिक्षण भी दिया है, ताकि यह पारंपरिक कला आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके। पद्म श्री सम्मान मिलने पर उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है और सिलंबम जैसी विरासत को स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान

के. पजानिवेल को इससे पहले वर्ष 2023 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें 2012 में पुडुचेरी सरकार का कलाइमामणि पुरस्कार, 2004 में नेहरू युवा केंद्र का सर्वश्रेष्ठ युवा पुरस्कार और 2002 में सिलंबम अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।

क्या है सिलंबम?

सिलंबम तमिलनाडु की लगभग 5,000 वर्ष पुरानी पारंपरिक युद्ध कला मानी जाती है। इसमें मुख्य रूप से बांस की लाठी का उपयोग किया जाता है। प्राचीन तमिल साहित्य में भी इसका उल्लेख मिलता है और ऐतिहासिक रूप से इसका उपयोग आत्मरक्षा व युद्ध कला के रूप में किया जाता रहा है।

#PadmaShri #Silambam #PMModi #IndianCulture #TraditionalMartialArts

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