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बिहार मामले में पहले दिए गए फैसले का हवाला; चुनाव आयोग के अधिकार पर पहले ही लग चुकी है सुप्रीम कोर्ट की मुहर
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को चुनौती देने वाली डीएमके समेत कुल 13 याचिकाओं पर गुरुवार को कार्यवाही बंद कर दी। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पहले ही फैसला दिया जा चुका है, इसलिए इन याचिकाओं पर अलग से सुनवाई की आवश्यकता नहीं है।
डीएमके के संगठन सचिव आर.एस. भारती की ओर से पेश अधिवक्ता विवेक सिंह ने अदालत को बताया कि बिहार में एसआईआर से संबंधित निर्णय आने के बाद इन याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। इसके बाद पीठ ने सभी 13 याचिकाओं का निपटारा कर दिया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग के इस अधिकार को बरकरार रखा था। डीएमके ने पिछले वर्ष तमिलनाडु में एसआईआर प्रक्रिया को असंवैधानिक, मनमाना और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से जुड़ी 54 चुनाव याचिकाओं के शीघ्र निस्तारण के लिए मद्रास हाईकोर्ट को विशेष निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर भी सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने समयबद्ध सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने का अनुरोध किया था, लेकिन सीजेआई ने कहा कि ऐसा आदेश देना “गलत नजीर” स्थापित करेगा।
हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को आवश्यक राहत के लिए मद्रास हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी। याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 86(7) का हवाला देते हुए छह माह के भीतर चुनाव याचिकाओं के निस्तारण की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चुनाव परिणामों को चुनौती देने वाले मामलों में अनावश्यक देरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया और कानून की मंशा के विपरीत है।
















