हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 1 मई : 2025,
अलीगढ़, 1 मई: अलीगढ़ नगर निगम और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के बीच दशकों पुराने ज़मीन विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। नगर निगम ने शहर के क्वार्सी थाना क्षेत्र स्थित नगला पटवारी में स्थित करीब 90 बीघा जमीन में से 41 बीघा जमीन एएमयू के कब्जे से मुक्त कराने का दावा किया है। निगम के मुताबिक यह जमीन नगर निगम की स्वामित्वाधीन है, जिस पर एएमयू वर्ष 1945 से कब्जा किए हुए था।
नगर निगम की ओर से जारी बयान के अनुसार, नगला पटवारी की गाटा संख्या 63 और 65 में स्थित 20 हेक्टेयर (लगभग 18,000 वर्ग मीटर) और 30 बीघा (लगभग 27,000 वर्ग मीटर) जमीन अभी भी एएमयू के कब्जे में है। इन जमीनों की कुल अनुमानित लागत लगभग 1.5 अरब रुपये आंकी गई है। निगम अधिकारियों के मुताबिक, अब भी लगभग 50 बीघा जमीन एएमयू के कब्जे में है, जिसे जल्द मुक्त कराने के प्रयास तेज़ कर दिए गए हैं।
नगर आयुक्त विनोद कुमार ने कहा, “यह नगर निगम की स्वामित्वाधीन भूमि है और इसे अवैध कब्जे से मुक्त कराना हमारी ज़िम्मेदारी है। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भू-संपत्ति विभाग पूरी गंभीरता से अभिलेखों को एकत्र कर विधिक कार्यवाही कर रहा है।”
एएमयू ने किया दावा: “भूमि हमारे वैध स्वामित्व में, हमारे पास विधिक प्रमाण हैं”
वहीं दूसरी ओर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने नगर निगम की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए इस पर आपत्ति जताई है। एएमयू प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि विवादित भूमि दशकों से विश्वविद्यालय की वैध संपत्ति रही है और उनके पास इससे जुड़े सभी कानूनी दस्तावेज, अभिलेखीय साक्ष्य एवं विधिक प्रमाण मौजूद हैं।
एएमयू के वक्तव्य में कहा गया है:
“यह भूमि विश्वविद्यालय की विधिसम्मत स्वामित्वाधीन संपत्ति है और इस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जे का प्रश्न ही नहीं उठता। विश्वविद्यालय सभी मामलों में कानून का पालन करता है और इस विषय में विधिक तथा प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।”
एएमयू ने सभी हितधारकों को आश्वस्त किया कि वह अपनी संस्थागत गरिमा, परिसंपत्तियों और अधिकारों की रक्षा हेतु प्रतिबद्ध है और इसे लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मामला अब विधिक पथ पर, सुलझाव की प्रतीक्षा
अब यह विवाद एक विधिक और प्रशासनिक लड़ाई का रूप ले चुका है, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने अधिकारों का दावा कर रहे हैं। एक ओर नगर निगम सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा मुक्त कराने के लिए कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एएमयू इसे अपने वैध स्वामित्वाधीन भूमि बता रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने अलीगढ़ के स्थानीय प्रशासन, शिक्षा जगत और आम नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले समय में न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही यह तय हो पाएगा कि यह जमीन वास्तव में किसकी है — नगर निगम की या विश्वविद्यालय की।














