• Home
  • Delhi
  • यूनिवर्सिटीज में समानता के नियम पहले से मौजूद फिर UGC के नए नियम क्यों ?
Image

यूनिवर्सिटीज में समानता के नियम पहले से मौजूद फिर UGC के नए नियम क्यों ?

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

यूनिवर्सिटीज में समानता के नियम: रोहित वेमुला मामले से यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 तक की पूरी टाइमलाइन

UGC Equity Regulations 2026 क्यों बने चर्चा का विषय?

देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को अधिसूचित किया। इन नए नियमों के तहत सभी यूनिवर्सिटीज में इक्विटी सेल बनाना अनिवार्य किया गया है, जो भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच, काउंसलिंग, जागरूकता और आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश करेगा।
हालांकि, इन नियमों को लेकर देशभर में विरोध भी देखने को मिल रहा है। आलोचकों का आरोप है कि इससे उच्च जातियों के छात्रों के खिलाफ झूठी शिकायतें बढ़ सकती हैं। इसी विरोध के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे ने भी इस मुद्दे को और हवा दी।

2012 से पहले ही मौजूद थे समानता के नियम

यह पहली बार नहीं है जब यूजीसी ने समानता से जुड़े नियम बनाए हों। वर्ष 2012 में ही हायर एजुकेशन इक्विलिटी रेगुलेशन 2012 लागू किया गया था। इसका उद्देश्य SC और ST छात्रों के खिलाफ भेदभाव को रोकना था। लेकिन समय के साथ यह सामने आया कि कई विश्वविद्यालयों ने इन नियमों को प्रभावी रूप से लागू ही नहीं किया।

रोहित वेमुला और पायल तडवी मामला बना टर्निंग पॉइंट

हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र रोहित वेमुला और मुंबई के नेशनल मेडिकल कॉलेज की आदिवासी छात्रा पायल तडवी की आत्महत्या ने देश को झकझोर दिया। इन घटनाओं के बाद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव और प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल उठे। इसके बाद समानता नियमों को और मजबूत करने की मांग तेज हो गई।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार और नए नियमों की जरूरत

वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर 2012 के नियमों के कमजोर क्रियान्वयन की ओर इशारा किया गया। बाद में 2025 में सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने यूजीसी को नए नियमों को अंतिम रूप न देने पर फटकार लगाई और छह सप्ताह का समय दिया। इसी दबाव के बाद 2026 के नए इक्विटी रेगुलेशन अस्तित्व में आए।

2012 और 2026 के नियमों में क्या बदला?
  • दायरा बढ़ा: अब SC-ST के साथ OBC, EWS, महिला और PWD वर्ग को भी शामिल किया गया है।
  • झूठी शिकायत पर प्रावधान हटाया गया: 2012 के नियमों में झूठी शिकायत पर कार्रवाई का प्रावधान था, जिसे 2026 में हटा दिया गया है।
एक्सपर्ट्स की राय बंटी

डीयू के प्रोफेसर और INTEC चेयरमैन डॉ. पंकज गर्ग का मानना है कि नए नियम समाज को बांट सकते हैं और झूठी शिकायतों की संभावना बढ़ा सकते हैं। वहीं, डीयू टीचर एसोसिएशन के पूर्व सदस्य डॉ. आनंद प्रकाश कहते हैं कि इन नियमों का उद्देश्य केवल भेदभाव रोकना है और यह कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप हैं।

यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसके क्रियान्वयन और संतुलन को लेकर बहस जारी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ये नियम वास्तव में भेदभाव कम करते हैं या नई चुनौतियां खड़ी करते हैं।

Releated Posts

लखनऊ में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबिन के दौरे से 2027 चुनावी तैयारी को धार

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :41 स्वागत बिंदुओं पर 25 सामाजिक वर्गों की भागीदारी, संगठनात्मक बैठकों में चुनावी रणनीति और…

ByByHindustan Mirror News Jul 4, 2026

ड्रोन से मिसाइल तक: ₹52 हजार करोड़ की रक्षा डील से बदलेगी भारतीय सेना की ताकत

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ : रक्षा मंत्रालय ने तीनों सेनाओं के लिए स्वदेशी हथियारों और आधुनिक रक्षा प्रणालियों को…

ByByHindustan Mirror News Jul 4, 2026

31 दिसंबर 2026 तक आधार में ईमेल अपडेट रहेगा मुफ्त, UIDAI ने दी बड़ी राहत

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :अब Aadhaar Mobile App के जरिए घर बैठे बिना किसी शुल्क के अपडेट होगी ईमेल…

ByByHindustan Mirror News Jul 4, 2026

हर्ष फायरिंग केस: बीजेपी विधायक राजू सिंह को 4 साल की जेल, 25 लाख का जुर्माना

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ : नए साल की पार्टी में चली गोली से महिला डॉक्टर की हुई थी मौत…

ByByHindustan Mirror News Jul 4, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top