हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 30 अप्रैल: 2025,
अलीगढ़, 30 अप्रैल:
लिंग समानता, समावेशी शैक्षिक वातावरण और एक सम्मानजनक परिसर संस्कृति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एडवांस्ड सेंटर फॉर विमेंस स्टडीज द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की जेंडर चैंपियन योजना के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। कार्यशाला में लिंग संवेदनशीलता, सामाजिक समावेशन और एक समतामूलक परिसर के निर्माण के लिए सामूहिक विचार-विमर्श और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए।
प्रो. अजरा मुसवी ने किया स्वागत
कार्यक्रम की शुरुआत एडवांस्ड सेंटर फॉर विमेंस स्टडीज की निदेशक प्रो. अजरा मुसवी के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने ‘जेंडर चैंपियंस’ की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये 16 वर्ष और उससे अधिक आयु के युवा छात्र-छात्राएं होते हैं जो परिसर में समानता, सह-अस्तित्व और आपसी सम्मान की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला युवाओं को नेतृत्व करने, सोचने और सामाजिक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करने का एक मंच है।
प्रो. रफीउद्दीन ने जोड़ा विज्ञान को सामाजिक उत्तरदायित्व से
डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर और रसायन शास्त्र विभाग के प्रो. रफीउद्दीन ने उद्घाटन भाषण में विज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व के मध्य संबंध पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समानता और संवेदनशीलता जैसे सामाजिक मुद्दों में भी अहम भूमिका निभाती है।
प्रो. विभा शर्मा ने दिया अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
जनसंपर्क कार्यालय की प्रमुख और अंग्रेजी विभाग की प्रो. विभा शर्मा ने लिंग मुद्दों पर एक अंतरविभागीय और वैश्विक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने स्टॉकहोम विश्वविद्यालय में अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार लिंग संवेदनशीलता को शैक्षिक प्रणालियों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों को इस दिशा में ठोस पहल करनी होगी।
विशेषज्ञ व्याख्यान और संवाद सत्रों से मिला मार्गदर्शन
कार्यशाला में लिंग जागरूकता पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसके बाद संवादात्मक सत्र हुए। इन सत्रों में डॉ. शीराज अहमद, डॉ. तौसीफ फातिमा और डॉ. तरुशिखा सर्वेश ने सहभागियों के साथ चर्चा की। सत्रों का उद्देश्य सहानुभूति विकसित करना, लिंग आधारित रूढ़ियों को तोड़ना और छात्रों में सामाजिक सक्रियता को बढ़ावा देना था।
इस आयोजन ने प्रतिभागियों को लिंग समानता के विषय पर सोचने, समझने और अपने परिसर में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा दी।














