हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
लोकतंत्र में विरोध संवाद का माध्यम, युवाओं की बात सुनना जरूरी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन
संवाद और सहमति बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों और युवाओं को
बेहतर व्यवस्था की मांग के लिए विरोध करने का पूरा अधिकार है। हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान
लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल की खबरों पर उन्होंने कहा कि बिना पूरी जानकारी के
किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
‘पैलेट गन क्यों चली, इसका कारण समझना होगा’
मोहन भागवत ने कहा कि उनके पास इन घटनाओं की पुख्ता जानकारी नहीं है, इसलिए वह यह नहीं
कह सकते कि कार्रवाई सही थी या गलत। उन्होंने कहा, “यह समझना जरूरी है कि ऐसी स्थिति क्यों
बनी और पैलेट गन चलाने की नौबत क्यों आई। कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनसे बिना किसी पूर्वाग्रह के किसी पर भरोसा करने को कहा जाए, तो वह
Gen Z पर आंख बंद करके भरोसा करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि आंदोलन में कुछ
असामाजिक तत्वों के शामिल होने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन ठोस जानकारी के अभाव में उस पर
टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
‘Gen Z की शिकायतें जायज, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
भागवत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपनी बात तार्किक ढंग से रखती है और जवाब भी तर्क के
आधार पर चाहती है। उनके अनुसार, देश की शिक्षा व्यवस्था में अभी भी व्यापक सुधार की
आवश्यकता है और युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि संवाद के
जरिए ही समाधान निकल सकता है।
‘आज की पीढ़ी अधिक ईमानदार और सवाल पूछने वाली’
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि पहले की पीढ़ियां सत्ता या अधिकारियों से सवाल पूछने से बचती थीं,
जबकि Gen Z और Gen Alpha तार्किक उत्तर चाहते हैं और सम्मानपूर्वक अपनी बात रखते हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं को देश-विरोधी करार देने के बजाय उनकी बात सहानुभूति के साथ सुनी जानी
चाहिए। उनके अनुसार, यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है और आने वाले भारत के निर्माण में युवाओं
की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होगी।




















