हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
16 सुरक्षाकर्मियों और तीन सरकारी वाहनों को किया वापस, डीजीपी को तीन बार पत्र लिखने के बाद भी कार्रवाई न होने पर जताई नाराजगी
रांची। झारखंड के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 सुरक्षाकर्मियों और तीन सरकारी वाहनों को वापस कर राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। मंत्री का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने एक अतिरिक्त वाहन उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन पुलिस विभाग ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके विरोध में उन्होंने पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही लौटा दी।
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि उनकी सुरक्षा में 16 पुलिसकर्मी तैनात हैं, जबकि उनके लिए केवल तीन सरकारी वाहन उपलब्ध कराए गए थे। उनका कहना है कि तीन गाड़ियों में 16 सुरक्षाकर्मियों का समुचित समायोजन व्यावहारिक नहीं है और किसी भी आपात स्थिति में यह सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं होगी। इसी कारण उन्होंने चौथे वाहन की मांग की थी।
डीजीपी को तीन बार लिखा पत्र
वित्त मंत्री ने दावा किया कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को 14 मार्च, 21 अप्रैल और 29 जून को तीन अलग-अलग पत्र भेजे, लेकिन किसी का भी जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि बाद में उनके विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के एक अधिकारी की ओर से सरकारी वाहन लौटाने का नोटिस जारी किया गया। इससे नाराज होकर उन्होंने न केवल वाहन बल्कि अपनी पूरी सुरक्षा व्यवस्था भी वापस कर दी।
माओवाद प्रभावित क्षेत्र से हैं मंत्री
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वह माओवाद प्रभावित पलामू जिले से आते हैं और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को अच्छी तरह समझते हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित करना है ताकि सुरक्षा प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री को नहीं दी जानकारी
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दी है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं किया। उनका मानना है कि यदि मुख्यमंत्री को इस बारे में बताया जाता तो वह उचित कार्रवाई जरूर करते, लेकिन यह पूरी तरह पुलिस विभाग की जिम्मेदारी का विषय है।
इस घटनाक्रम के बाद झारखंड की राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और विपक्ष भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है।













