प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) की इंटरमीडिएट परीक्षा के पैटर्न में बदलाव की तैयारी है। नई व्यवस्था के तहत इंटरमीडिएट में लिखित परीक्षा 80 अंकों की होगी। वहीं 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन और प्रयोगात्मक कार्य के लिए निर्धारित किए जाने की तैयारी है।
यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 और राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र (PARAKH) की सिफारिशों के आधार पर किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा 11 में लागू करने की तैयारी है।
कक्षा 11 से लागू करने की तैयारी
नई मूल्यांकन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। शुरुआत कक्षा 11 से किए जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की केवल लिखित परीक्षा पर निर्भरता कम करना है।
इसके बजाय आंतरिक मूल्यांकन, प्रयोगात्मक कार्य, अनुप्रयोग और विश्लेषणात्मक क्षमता को भी महत्व दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 और कक्षा 11 के अग्रिम पंजीकरण से संबंधित सूचनाएं भी उपलब्ध हैं।
लिखित परीक्षा में 80 अंक
नई व्यवस्था में इंटरमीडिएट के संबंधित विषयों में लिखित परीक्षा का हिस्सा 80 अंक किया जाएगा। शेष 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन या प्रयोगात्मक मूल्यांकन के लिए रखे जाएंगे।
इस बदलाव से विद्यार्थियों के पूरे वर्ष के प्रदर्शन को भी महत्व मिलेगा। अब केवल बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मूल्यांकन करने के बजाय सालभर की शैक्षणिक गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा।
प्रश्नपत्र में बढ़ेंगे अनुप्रयोग आधारित प्रश्न
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रश्नपत्र में अनुप्रयोग आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ाना है।
राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने कक्षा 11 और 12 के लिए इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और नागरिक शास्त्र जैसे विषयों में प्रतिदर्श प्रश्नपत्र तैयार किए हैं। इनमें अनुप्रयोग आधारित प्रश्नों को अधिक महत्व दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार अनुप्रयोग आधारित प्रश्नों का हिस्सा 35 प्रतिशत तक रखने का प्रावधान प्रस्तावित है।
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल तथ्य याद करने के बजाय सीखी हुई जानकारी का वास्तविक परिस्थितियों में प्रयोग करने के लिए तैयार करना है।
ज्ञान से अधिक समझ और अनुप्रयोग पर जोर
पुराने प्रश्नपत्रों में ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग और कौशल का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता रहा है। नई व्यवस्था में इस पैटर्न को और अधिक व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है।
प्रस्तावित प्रतिदर्श प्रश्नपत्र में ज्ञान 17.5 प्रतिशत, बोध 17.5 प्रतिशत, अनुप्रयोग 35 प्रतिशत, विश्लेषण 22 प्रतिशत, मूल्यांकन 4 प्रतिशत और सृजन 4 प्रतिशत के आधार पर प्रश्नों को शामिल करने की बात कही गई है।
इससे विद्यार्थियों में विश्लेषण करने, तर्क प्रस्तुत करने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने पर जोर रहेगा।
प्रत्येक यूनिट से प्रश्न पूछना अनिवार्य
नई व्यवस्था में प्रश्नपत्र तैयार करते समय पाठ्यक्रम की प्रत्येक यूनिट को महत्व दिया जाएगा। प्रत्येक यूनिट से प्रश्न पूछना अनिवार्य किया गया है।
इसके अलावा प्रश्नों की कठिनाई का स्तर भी निर्धारित किया जाएगा। इससे प्रश्नपत्र में केवल आसान या तथ्यात्मक प्रश्नों की अधिकता नहीं रहेगी।
विद्यार्थियों को पूरे पाठ्यक्रम की तैयारी करनी होगी। किसी एक अध्याय या यूनिट के भरोसे परीक्षा की तैयारी करना अब पर्याप्त नहीं होगा।
वैकल्पिक प्रश्नों का स्वरूप भी बदलेगा
नई प्रश्नपत्र संरचना में वैकल्पिक प्रश्नों को भी अधिक उद्देश्यपूर्ण बनाने की तैयारी है। रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक यूनिट से प्रश्न पूछे जाने के साथ उनकी कठिनाई और उद्देश्य पर भी ध्यान दिया जाएगा।
वर्णनात्मक प्रश्नों की संख्या में कमी की जा सकती है। वहीं विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए जाएंगे।
इससे विद्यार्थियों की केवल उत्तर लिखने की क्षमता नहीं, बल्कि चिंतन, विश्लेषण और रचनात्मक सोच का भी मूल्यांकन किया जा सकेगा।
66 प्रतिशत प्रश्न अनुप्रयोग और उच्च स्तरीय क्षमता पर आधारित
प्रस्तावित प्रश्नपत्र में अनुप्रयोग, विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजन जैसे उच्च स्तरीय कौशलों को विशेष महत्व दिया गया है।
यदि प्रस्तावित प्रतिशतों को देखा जाए तो अनुप्रयोग, विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजन को मिलाकर 65 प्रतिशत अंक बनते हैं। रिपोर्ट में इसे व्यापक रूप से उच्च स्तरीय और अनुप्रयोग आधारित मूल्यांकन की दिशा में बड़ा बदलाव बताया गया है।
इसका सीधा असर विद्यार्थियों की तैयारी पर पड़ेगा। अब केवल पाठ्यपुस्तक की सामग्री याद करना पर्याप्त नहीं होगा।
प्रायोगिक विषयों में भी बदलेगा अंक विभाजन
वर्तमान व्यवस्था में कुछ इंटरमीडिएट विषयों में लिखित और प्रायोगिक परीक्षा के बीच अलग-अलग अंक निर्धारित होते हैं। नई व्यवस्था में अंक विभाजन को संशोधित करने की तैयारी है।
इसका उद्देश्य आंतरिक मूल्यांकन और प्रयोगात्मक कार्य को अधिक प्रभावी बनाना है। विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट, गतिविधियों और व्यावहारिक समझ को भी मूल्यांकन प्रक्रिया में स्थान दिया जाएगा।
विद्यार्थियों को क्या करना होगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थियों को सालभर पढ़ाई पर ध्यान देना होगा। केवल बोर्ड परीक्षा से कुछ महीने पहले तैयारी शुरू करना पर्याप्त नहीं रहेगा।
उन्हें प्रत्येक यूनिट की अवधारणा समझनी होगी। साथ ही प्रश्नों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने का अभ्यास करना होगा।
इसके अलावा मॉडल पेपर और अनुप्रयोग आधारित प्रश्नों को हल करना भी उपयोगी रहेगा। शिक्षकों को भी कक्षा में गतिविधि आधारित और competency-based teaching पर अधिक ध्यान देना होगा।
शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
नई मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य परीक्षा को केवल रटने की प्रक्रिया से बाहर निकालना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों की समझ, अनुप्रयोग, विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजनात्मक क्षमता को मापने की कोशिश की जाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी रटने के बजाय समझ और कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है। UP Board की प्रस्तावित नई व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बातें
- इंटरमीडिएट में लिखित परीक्षा 80 अंकों की करने की तैयारी।
- 20 अंक आंतरिक/प्रयोगात्मक मूल्यांकन के लिए।
- बदलाव को कक्षा 11 से लागू करने की तैयारी।
- अनुप्रयोग आधारित प्रश्नों पर अधिक जोर।
- प्रत्येक यूनिट से प्रश्न पूछना अनिवार्य करने की तैयारी।
- विश्लेषण और रचनात्मक क्षमता का मूल्यांकन बढ़ेगा।
- केवल रटने के बजाय अवधारणा समझना जरूरी होगा।
- पूरे वर्ष के प्रदर्शन को अधिक महत्व मिलेगा।
नोट: नई व्यवस्था को लेकर अंतिम लागू नियम, विषयवार अंक-विभाजन और प्रभावी सत्र की आधिकारिक अधिसूचना UP Board द्वारा जारी किए जाने के बाद ही अंतिम माने जाएंगे। अभ्यर्थी और विद्यालय परिषद की आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता दें।
आधिकारिक वेबसाइट: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP)













