हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ 25 मई : 2025
लखनऊ, शनिवार देर रात: वजीरगंज क्षेत्र स्थित रेजीडेंसी के पास शनिवार देर रात उस समय सनसनी फैल गई जब वकीलों के दो गुटों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर फायरिंग हो गई। इस फायरिंग में दो अधिवक्ताओं – कुंवर अंबिका सिंह उर्फ डब्बू सिंह और साकिब हसन को गोली लग गई। दोनों को गंभीर अवस्था में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है।
घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। एसीपी चौक राजकुमार सिंह और इंस्पेक्टर वजीरगंज राकेश त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और घायलों का हाल जानने ट्रॉमा सेंटर भी गए। वहीं, डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है, और तहरीर मिलने के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
मड़ियांव निवासी कुंवर अंबिका सिंह उर्फ डब्बू सिंह के रिश्तेदार दिलीप सिंह का रेजीडेंसी के पास एक अधिवक्ता चैंबर है। शनिवार देर रात अंबिका सिंह कुछ साथियों के साथ उसी चैंबर में बैठे हुए थे। उसी दौरान मलिहाबाद निवासी अधिवक्ता साकिब हसन अपने साथियों के साथ वहां पहुंचे।
दोनों पक्षों के बीच पहले से चली आ रही किसी पुरानी रंजिश को लेकर बहस शुरू हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि देखते ही देखते दोनों ओर से फायरिंग होने लगी।
फायरिंग में अंबिका सिंह को कमर, पैर और हाथ में गोली लगी, जबकि साकिब हसन को गर्दन के पास गोली लगी। मौके पर मौजूद लोगों ने दोनों को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया।
घटना के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर फायरिंग का आरोप लगाया है। अंबिका सिंह का कहना है कि साकिब हसन अपने साथियों के साथ जबरन उनके चैंबर में घुसे और गाली-गलौज के बाद फायरिंग शुरू कर दी। वहीं साकिब हसन का दावा है कि वह पुराने विवाद को सुलझाने के इरादे से बातचीत करने पहुंचे थे, लेकिन वहां पहले से ही हमले की साजिश रची गई थी और उन पर गोलियां चला दी गईं।
पुलिस इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच में जुट गई है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गोली किसने चलाई और घटना की असली वजह क्या थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल दोनों पक्षों से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। तहरीर मिलने के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी।
वकीलों के बीच बढ़ती तनातनी पर चिंता
यह घटना न सिर्फ वकील समुदाय के भीतर आपसी तनाव को उजागर करती है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। अदालत परिसर और उससे जुड़े इलाकों में इस तरह की घटनाएं न सिर्फ असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं, बल्कि आम नागरिकों में भी भय का माहौल उत्पन्न करती हैं।

















