हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
🔶 पर्व का महत्व
हनुमान जयंती का दिन भगवान हनुमान के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और विशेष माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में यह पर्व 2 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखकर पूजा-अर्चना और कथा पाठ करने से जीवन के सभी दुख, संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं तथा सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
🔶 हनुमान जी के जन्म की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता अंजना पूर्व जन्म में एक अप्सरा थीं, जिन्हें श्राप के कारण वानर रूप में पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। श्राप से मुक्ति के लिए उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया।
उधर अयोध्या में राजा दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ कर रहे थे, जिसमें अग्निदेव से प्राप्त दिव्य खीर का एक अंश एक पक्षी द्वारा उड़ाकर माता अंजना तक पहुंचा। पवन देव की सहायता से यह प्रसाद उनके हाथों में गिरा, जिसे ग्रहण करने के बाद चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ। इसी कारण उन्हें पवनपुत्र भी कहा जाता है।
🔶 बाल्यकाल की प्रसिद्ध कथा
हनुमान जी के बचपन की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार उन्हें भूख लगी और उन्होंने आकाश में चमकते सूर्य को फल समझ लिया। वे उसे खाने के लिए उड़ पड़े। तभी देवराज इंद्र ने वज्र से प्रहार कर उन्हें रोक दिया, जिससे वे मूर्छित हो गए।
इस घटना से क्रोधित पवन देव ने वायु प्रवाह रोक दिया, जिससे सृष्टि संकट में पड़ गई। तब सभी देवताओं ने मिलकर हनुमान जी को जीवित किया और उन्हें अद्भुत शक्तियों का वरदान दिया।
🔶 व्रत कथा पढ़ने का महत्व
हनुमान जयंती पर व्रत कथा का पाठ करने से आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है। मान्यता है कि इससे शनि और मंगल दोष शांत होते हैं तथा अकाल मृत्यु का भय भी समाप्त हो जाता है। श्रद्धा से हनुमान जी का स्मरण करने पर जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।
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