हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
11वीं शताब्दी की धरोहर की हुई वापसी
भारत को अपनी एक और ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत वापस मिल गई है। नीदरलैंड ने चोल राजवंश से जुड़े 11वीं शताब्दी के ऐतिहासिक ताम्रपत्र भारत को सौंप दिए हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi की मौजूदगी में यह हस्तांतरण हुआ, जिसे दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। पीएम मोदी ने इसे हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी का क्षण बताया।

21 बड़े और 3 छोटे ताम्रपत्र शामिल
इन ऐतिहासिक ताम्रपत्रों में 21 बड़े और 3 छोटे शिलालेख शामिल हैं। अधिकांश शिलालेख तमिल भाषा में अंकित हैं, जबकि कुछ संस्कृत में भी लिखे गए हैं। ये शिलालेख सम्राट Rajendra Chola I द्वारा अपने पिता Rajaraja Chola I के दिए गए मौखिक वचन को औपचारिक रूप देने के लिए तैयार कराए गए थे। इनमें चोल साम्राज्य की गौरवशाली संस्कृति और समुद्री शक्ति का भी वर्णन किया गया है।
भारत 2012 से कर रहा था प्रयास
भारत वर्ष 2012 से इन अनाइमंगलम ताम्रपत्रों की वापसी के लिए प्रयासरत था, जिन्हें नीदरलैंड में “लीडेन प्लेट्स” के नाम से जाना जाता है। पीएम मोदी ने नीदरलैंड सरकार और लीडेन विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इन धरोहरों को वर्षों तक सुरक्षित रखा।
30 किलोग्राम वजन की ऐतिहासिक धरोहर
करीब 30 किलोग्राम वजन वाले इन ताम्रपत्रों को चोल राजवंश की शाही मुहर लगी कांस्य अंगूठी से जोड़ा गया है। ये ताम्रपत्र तमिलनाडु के नागपट्टिनम स्थित बौद्ध विहार को अनाइमंगलम गांव दान किए जाने से संबंधित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये चोल काल की सबसे महत्वपूर्ण संरक्षित धरोहरों में शामिल हैं।
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