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CBI जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा रसायन विज्ञान के रिटायर्ड लेक्चरर डॉ. पीवी कुलकर्णी की हो रही है, जिन्हें जांच एजेंसी इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड मान रही है। हाल ही में कुलकर्णी और उनकी सहयोगी मनीषा मंधारे को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने दोनों को 10 दिन की CBI हिरासत में भेज दिया।
रिटायरमेंट के बाद बना परीक्षा नेटवर्क का हिस्सा
महाराष्ट्र के लातूर निवासी पीवी कुलकर्णी ने करीब 28 से 30 वर्षों तक दयानंद शिक्षण संस्था में अध्यापन किया। चार वर्ष पहले सेवानिवृत्ति के बाद वह पुणे चले गए। जांच में सामने आया कि वह वर्ष 2011 से DEEPER नामक संस्था से जुड़े थे, जो मॉक टेस्ट और प्रतियोगी परीक्षा तैयारी गतिविधियां संचालित करती थी।
छात्रों तक पहुंचाने के लिए बनाया गया नेटवर्क
CBI के अनुसार, कुलकर्णी और मनीषा मंधारे ने महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में सेमिनार और पुराने छात्रों के नेटवर्क के जरिए NEET अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाई। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कोचिंग संस्थानों और मॉक टेस्ट के डेटा का उपयोग अकादमिक रूप से कमजोर छात्रों की पहचान के लिए किया गया।
अभिभावकों की शिकायत से खुला मामला
जांच के दौरान पुलिस को वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी मिली। बताया गया कि परीक्षा के दिन मनीषा वाघमारे के खाते में 10 लाख रुपये ट्रांसफर हुए, जबकि कई छात्रों ने अलग-अलग रकम जमा की थी। एक अभिभावक की शिकायत के बाद जांच का दायरा बढ़ा और मामला CBI तक पहुंचा।
प्रोफेसर मनीषा भी जांच के घेरे में
मनीषा मंधारे पुणे के मॉडर्न कॉलेज में पिछले 24 वर्षों से जीव विज्ञान की प्रोफेसर थीं। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया सीधे NTA और संबंधित प्रोफेसर के बीच होती है तथा जांच में पूरा सहयोग दिया जाएगा।
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