हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
लखनऊ: King George’s Medical University (KGMU) में खुद को MBBS डॉक्टर बताने वाले हसम अहमद को गिरफ्तार कर पुलिस के हवाले कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया। आरोपी पर संस्थान के नाम, मोहर और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और छात्रों को गुमराह करने के गंभीर आरोप हैं।

फर्जी दस्तावेज और नोटिस का खेल
जांच में सामने आया कि हसम अहमद KGMU के नाम पर नकली लेटरहेड और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर दस्तावेज तैयार करता था। इनमें “भारतीय गौरव प्रतिभा सम्मान 2026” प्रमाणपत्र, होली अवकाश नोटिस और MBBS 2023 बैच से जुड़े चयन पत्र शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने इन्हें प्रथम दृष्टया फर्जी बताया है।
कैंपस में लगाता था मेडिकल कैंप
प्रशासन के मुताबिक आरोपी खुद को डॉक्टर बताकर कैंपस और आसपास मेडिकल कैंप आयोजित करता था। डॉक्टर की वेशभूषा में वह विभिन्न विभागों में घुसने की कोशिश करता था। 20 अप्रैल को उसकी गतिविधियां संदिग्ध मिलने पर निगरानी बढ़ाई गई और सर्जरी विभाग के पास उसे पकड़ लिया गया।
छात्रों, खासकर छात्राओं से संपर्क का आरोप
जांच टीम को जानकारी मिली कि आरोपी कथित कार्यक्रमों के नाम पर छात्रों, विशेषकर छात्राओं से संपर्क करता था। फर्जी पत्रों के जरिए उन्हें कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए बुलाया जाता था, जिनमें All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) में होने वाले आयोजनों का भी उल्लेख किया गया था।
सिर्फ 12वीं पास, खुद को बताता था डॉक्टर
प्रारंभिक पूछताछ में हसम अहमद ने खुद को सिर्फ इंटरमीडिएट पास बताया है। उसने लखनऊ के एक इंटर कॉलेज से पढ़ाई करने की बात कबूल की है। साथ ही, समाज सेवा के नाम पर एक संस्था चलाने का दावा भी किया।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
KGMU प्रशासन ने कहा कि संस्थान के नाम का दुरुपयोग किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि किसी भी सूचना पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।
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