मुख्य सचिव ने दिए खेत से लेकर उद्योग और सड़कों तक प्रदूषण नियंत्रण के कड़े निर्देश, लापरवाही पर अधिकारियों को नोटिस
लखनऊ। एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने निगरानी और कार्रवाई का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद शासन स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में पराली प्रबंधन, प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों, सड़क की धूल, वाहनों और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित विभागों को निर्धारित लक्ष्य के साथ काम करने और नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक के लिए खेत स्तर पर निगरानी मजबूत करने और किसानों को लगातार जागरूक करने को कहा। उन्होंने पराली प्रबंधन के लिए बेलर समेत जरूरी कृषि मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। लंबित टेंडर प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने के निर्देश भी दिए गए, ताकि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन में परेशानी न हो।
बैठक में प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। विभागों को नोडल अधिकारी नामित कर आपसी समन्वय से औद्योगिक क्षेत्रों की नियमित निगरानी करने को कहा गया। सड़क से उड़ने वाली धूल को भी प्रदूषण का प्रमुख स्रोत मानते हुए रोड रिडेवलपमेंट, गड्ढों की मरम्मत और क्षतिग्रस्त फुटपाथों के पुनर्स्थापन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही ईवी सिटी बसों की खरीद प्रक्रिया तेज करने और चार्जिंग प्वाइंट के लिए संभावित स्थान चिह्नित कर नेडा को उपलब्ध कराने को कहा गया। पवन पोर्टल पर सही और अद्यतन आंकड़े दर्ज करने तथा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि अपेक्षित प्रगति नहीं करने वाले जिलों के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए मासिक लक्ष्य तय कर उनकी नियमित समीक्षा होगी। साथ ही आमजन की भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।
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