हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के तीन वरिष्ठ ऑपरेटिव्स — गाजी मुमताज, मोहम्मद खुजैमा कासिम और खालिद बशीर — की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, पर मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्र इन मौतों को संगठन के भीतर के तनाव या बाहरी तंत्र की कारस्तानी से जोड़कर देख रहे हैं।
गाजी मुमताज: जनाजा और परिस्थितियाँ
रिपोर्ट्स के अनुसार, अपर दीर का रहने वाला गाजी मुमताज LeT का एक वरिष्ठ मेंबर और कुख्यात आतंकी बताया जाता है। उसे संदिग्ध हालात में मृत पाया गया और बताया जा रहा है कि आज शाम लगभग साढ़े छह बजे नुसरत कोटो प्राइमरी स्कूल में उसका जनाजा पढ़ाया जाएगा। मौत की पृष्ठभूमि पर फिलहाल ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मोहम्मद खुजैमा कासिम: कथित हिट-एंड-रन
दूसरी घटना बहावलपुर में हुई, जहां मोहम्मद खुजैमा कासिम की reported तौर पर एक हिट-एंड-रन में मौत हो गई। खबरों में कहा गया है कि कासिम LeT के वरिष्ठ नेता मोहम्मद याक़ूब के भाई थे। उनका अंतिम संस्कार कल रात हुआ, जिसमें संगठन से जुड़े कई वरिष्ठ चेहरे शामिल हुए — यह बताता है कि समूह के भीतर अभी भी कुछ सार्वजनिक समर्थन मौजूद है।
खालिद बशीर: एक और संदिग्ध मौत
तीसरा नाम खालिद बशीर का है, जिनकी भी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें भी LeT का वरिष्ठ ऑपरेटिव बताया गया है, पर मृत्यु के कारण और समय को लेकर स्पष्ट विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
पहले से चली आ रही हत्याओं की कड़ी
हाल के वर्षों में LeT के कई अन्य शीर्ष कमांडरों और सहयोगियों की भी रहस्यमयी या हिंसक मौतें हुई हैं। उदाहरण के तौर पर:
- शेख यूसुफ अफरीदी को खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या की।
- बिलाल आरिफ सराफी, जो भर्ती के लिए जिम्मेदार बताए जाते थे, की मुरीदके में हत्या कर दी गई थी, जिसे बाद में परिवार द्वारा अंजाम दिया गया कहा गया।
- को-फाउंडर आमिर हमजा को लाहौर में रहस्यमयी हमले में मारा गया।
- LeT के राजनीतिक विंग Pakistan Markazi Muslim League (PMML) के प्रमुख मौलाना काशिफ अली की भी स्वाबी में घर के बाहर गोली मारकर हत्या की गई थी।
आंतरिक कलह या बाहरी हस्तक्षेप?
इन लगातार हो रही हत्याओं ने सवाल उठाए हैं कि क्या यह संगठन के भीतर फूट का नतीजा है, कि जिसके कारण अपने ही लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, या फिर किसी बाहरी एजेंसी/प्रतिद्वंद्वी समूह की कार्रवाई है। कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सार्वजनिक कार्यक्रमों, जैसे अंतिम संस्कारों में LeT और उसके राजनीतिक प्रॉक्सी के नेताओं की उपस्थिति संगठन की जमीनी पहुँच और नेटवर्क का संकेत देती है, भले ही बीच-बीच में नेता निशाना बनते रहें।
अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय निहितार्थ
इन घटनाओं से पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क की कमज़ोरी, भीतरखाने की असमंजस और सुरक्षा खुफिया तंत्र की चुनौतियों दोनों पर सवाल उठते हैं। साथ ही, जब LeT जैसे संगठनों के शीर्ष कमांडर हटते हैं तो स्थानीय स्तर पर नेतृत्व संघर्ष और संगठनात्मक पुनर्गठन की संभावनाएं बढ़ती हैं, जो अगले कुछ महीनों में हिंसा के स्वरूप और लक्ष्यों को बदल सकती हैं।













