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उत्तर प्रदेश सरकार: दिव्यांगजन शादी-विवाह प्रोत्साहन योजना बनी सामाजिक बदलाव का प्रतीक

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ 20 मई : 2025

उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में सरकार की “दिव्यांगजन शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना” एक महत्वपूर्ण और मानवीय पहल बनकर उभरी है। यह योजना न केवल दिव्यांगजनों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि समाज में उनके प्रति सकारात्मक सोच और सम्मान को भी बढ़ावा देती है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना की शुरुआत वर्ष 2017-18 में की थी। तब से लेकर अब तक 5,893 दिव्यांग दंपतियों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल चुका है। योजना के अंतर्गत सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में ई-पेमेंट के माध्यम से भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और त्वरित बन गई है।

योजना के तहत सहायता राशि इस प्रकार निर्धारित की गई है:

  • यदि दूल्हा दिव्यांग है – ₹15,000
  • यदि दुल्हन दिव्यांग है – ₹20,000
  • यदि दोनों दिव्यांग हैं – ₹35,000

इस योजना का लाभ विवाह के बाद ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से मिलता है। इसके लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग स्वयं पात्र जोड़ों की पहचान करता है और उन्हें योजना की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाता है।

सरकार ने वर्ष 2024-25 के बजट में इस योजना के लिए 264 लाख रुपये का प्रावधान किया है। इस बजट के तहत 1,131 दिव्यांग दंपतियों को सहायता प्रदान करने का लक्ष्य तय किया गया है, जिनमें से अब तक 819 जोड़ों को सीधा लाभ दिया जा चुका है।

प्रदेश सरकार इस योजना को केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं मानती, बल्कि इसे सामाजिक बदलाव और बराबरी के अधिकार का प्रतीक मानती है। राज्य के पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने योजना को लेकर कहा:

यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि हर दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बने और समाज में उन्हें पूरा सम्मान मिले।

सरकार का स्पष्ट मानना है कि दिव्यांगता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि विशेषता है। जो लोग दिव्यांगजनों से विवाह कर रहे हैं, वे समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। इस सोच को मजबूती देने के लिए सरकार ऐसे दंपतियों को न केवल प्रोत्साहन राशि देती है, बल्कि समाज में समानता और सम्मान का संदेश भी प्रसारित करती है।

देश में लंबे समय तक दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा से कटे रहे। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्वीकृति की कमी ने उन्हें पीछे कर दिया। लेकिन अब उत्तर प्रदेश जैसे राज्य नीति और संवेदना दोनों का संतुलन साधते हुए दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं।

शादी जैसे निजी निर्णयों में सरकारी समर्थन और सामाजिक सहयोग दिव्यांगजनों को आत्मविश्वास और सम्मान प्रदान कर रहा है।

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