नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ : स्वतंत्रता दिवस से पहले राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े स्तर पर काउंटर टेररिज्म एक्सरसाइज की। शनिवार को आयोजित इस अभ्यास को ‘सुदर्शन शक्ति-V’ नाम दिया गया। करीब 17 घंटे चले इस अभ्यास में दिल्ली पुलिस के साथ देश की प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों और आपातकालीन सेवाओं ने हिस्सा लिया। अभ्यास का उद्देश्य आतंकी हमले जैसी गंभीर परिस्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों, त्वरित कार्रवाई और आपसी समन्वय को परखना था।
कई एजेंसियों ने मिलकर किया अभ्यास
इस संयुक्त एक्सरसाइज में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल SWAT, जिला पुलिस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड, ट्रैफिक पुलिस, क्राइम ब्रांच, IGI एयरपोर्ट, मेट्रो और PCR समेत कई यूनिट शामिल रहीं। इनके अलावा NSG, भारतीय सेना, NDRF, CISF, BCAS, AAI, DMRC, फायर सर्विस, FSL, CATS एंबुलेंस और स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी भूमिका निभाई।
एक साथ कई आतंकी हमलों का बनाया सीन
अभ्यास के दौरान राजधानी के अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों पर एक साथ कई आतंकी हमलों जैसी परिस्थितियां तैयार की गईं। इनमें बम धमाके, अंधाधुंध फायरिंग, बंधक बनाए जाने, विमान हाईजैक और CBRNE (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर) खतरे जैसी स्थितियों को शामिल किया गया। सुरक्षा बलों ने इन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और संयुक्त कार्रवाई की क्षमता का प्रदर्शन किया।
इन प्रमुख स्थानों पर हुई मॉक ड्रिल
अभ्यास के लिए कश्मीरी गेट ISBT, कनॉट प्लेस, नेहरू प्लेस मार्केट, सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली सचिवालय, जेएलएन स्टेडियम, IGI एयरपोर्ट, V3S मॉल, लाल किला मेट्रो स्टेशन, संस्कृति स्कूल, ISKCON मंदिर और कालकाजी मंदिर जैसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण स्थानों को शामिल किया गया।
17 घंटे तक चला सुरक्षा अभ्यास
दिल्ली पुलिस के अनुसार, एक्सरसाइज 7 अगस्त सुबह 10 बजे शुरू होकर 8 अगस्त सुबह करीब चार बजे तक चली। यह इस सालाना अभ्यास का पांचवां संस्करण है। पहले इसे ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ के नाम से आयोजित किया जाता था। गृह मंत्रालय के निर्देश पर NSG और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अभ्यास का समन्वय किया।
स्वतंत्रता दिवस से पहले तैयारियों की परीक्षा
स्वतंत्रता दिवस से पहले हुए इस अभ्यास को सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि राजधानी में एक साथ कई आतंकी घटनाएं होने की स्थिति में सुरक्षा और आपातकालीन एजेंसियां कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देती हैं और उनके बीच कितना प्रभावी तालमेल रहता है।













