हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़
भुगतान पर रोक, लेकिन नए कनेक्शनों में वही मीटर अनिवार्य
लखनऊ। प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर जारी असमंजस के बीच नए बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ता सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों के भुगतान पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कंपनियों ने काम ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ नहीं किया, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। जब तक उपभोक्ताओं को पूर्ण संतुष्टि नहीं मिलती, तब तक कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
जांच जारी, फिर भी नए कनेक्शन में स्मार्ट मीटर जरूरी
हालांकि, पावर कॉरपोरेशन के आदेश ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है, लेकिन नए कनेक्शन लेने वालों को उन्हीं स्मार्ट मीटरों से जोड़ना अनिवार्य रखा गया है, जिनकी गुणवत्ता की जांच चल रही है। इससे उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
प्रीपेड सिस्टम पर भी उठे सवाल
नए कनेक्शनों को प्रीपेड मोड में देने की अनिवार्यता भी विवाद का कारण बन रही है। यह व्यवस्था केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की उस अधिसूचना के विपरीत बताई जा रही है, जिसमें प्रीपेड अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया था। बावजूद इसके, पावर कॉरपोरेशन आरडीएसएस योजना के तहत लगाए जा रहे मीटरों को प्रीपेड मोड में ही लागू कर रहा है।
उपभोक्ताओं के सवाल और जांच पर संदेह
उपभोक्ताओं का सवाल है कि जब मीटरों की जांच चल रही है, तो इन्हें नए कनेक्शन में क्यों लगाया जा रहा है। साथ ही, यदि मीटर तेज चलने की शिकायत सही साबित होती है, तो अतिरिक्त बिल की भरपाई कैसे होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मीटर जांच एक जटिल प्रक्रिया है, जिसे राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में परीक्षण के बाद ही प्रमाणित किया जा सकता है। ऐसे में 10 दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देशों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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