हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑17 मई : 2025
अलीगढ़, 17 मई 2025। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अलीगढ़ के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश श्री अनुपम कुमार के निर्देशानुसार जिला कारागार में एक विशेष विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य कारागार में निरूद्ध विचाराधीन एवं दोषसिद्ध बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों एवं उपलब्ध विधिक सेवाओं के प्रति जागरूक करना था।
जिला कारागार के जेलर कमलेन्द्र प्रताप सिंह ने शिविर में बताया कि यहाँ कुल 1777 बंदी निरूद्ध हैं, जिनमें से विचाराधीन बंदियों की संख्या 1193 है, जबकि 575 दोषसिद्ध बंदी हैं। इसके अलावा 2 रोपकार बंदी और 7 विदेशी बंदी भी कारागार में हैं। शिविर में निरूद्ध विचाराधीन एवं दोषसिद्ध बंदियों को बताया गया कि जिनकी जमानत न्यायालय द्वारा पहले से मंजूर है, लेकिन जमानत बंधपत्र न दाखिल होने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पाई है, वे शीघ्र न्यायालय में जमानत बंधपत्र प्रस्तुत कराएं। आर्थिक रूप से कमजोर बंदी, जिनके पास खेतबाड़ी या स्थायी आय का स्रोत नहीं है, वे कारागार में नियुक्त पीएलवी या नियमित दौरे पर आने वाले लीगल एड डिफेंस काउंसिल से प्रार्थना पत्र लिखवाकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेज सकते हैं। इसके बाद उनकी जमानत की शर्तों को शिथिल करने का प्रयास किया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव नितिन श्रीवास्तव ने बंदियों को जानकारी दी कि यदि किसी विचाराधीन बंदी के पास निजी अधिवक्ता नहीं है, तो उसे निःशुल्क सरकारी अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाएगा, जो उनके वादों की पैरवी करेगा। शिविर में उपस्थित 7 पुरुष बंदियों ने निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने की मांग की, जिस पर संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे प्रार्थना पत्र लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजें ताकि उचित कार्रवाई हो सके।

शिविर में 8 विचाराधीन बंदियों ने आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जमानत दाखिल कराने में असमर्थता जताई। इस पर असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल कृष्ण कुमार को निर्देशित किया गया कि वे संबंधित बंदियों के प्रकरणों की आवश्यक कार्यवाही कर सचिव को रिपोर्ट दें।
एक रोपकार बंदी से सचिव ने संवाद किया, जिसने बताया कि उसका अलीगढ़ में कोई परिवारजन नहीं है और उसका बेटा हरियाणा में रहता है, लेकिन उससे उसका कोई संपर्क नहीं है। सचिव ने उसे निर्देश दिया कि वह उच्च न्यायालय में जमानत प्रार्थना हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रार्थना पत्र भेजे, ताकि लीगल एड सर्विस कमेटी के समक्ष मामला प्रस्तुत किया जा सके।
शिविर के पश्चात सचिव द्वारा महिला बैरक का भी निरीक्षण किया गया। जेलर कमलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि महिला बैरक में 68 महिला बंदी निरूद्ध हैं, जिनके साथ 6 बच्चे भी हैं। एक महिला बंदी ने बताया कि बच्चों को आधा लीटर दूध का पैकेट, केला, बिस्कुट एवं भोजन दिया जाता है। महिला बंदियों से भी जमानत संबंधित जानकारी मांगी गई और उन्हें भी निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।
एक सजायाफ्ता महिला बंदी ने बताया कि न्यायालय ने उस पर 65,000 रुपये का अर्थदंड लगाया है, जो वह भरने में असमर्थ है। सचिव ने उसे आश्वासन दिया कि उसकी समस्या का प्रार्थना पत्र के माध्यम से उचित समाधान किया जाएगा।
विधिक जागरूकता शिविर में डिप्टी जेलर राजकुमार, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल जगदीश सारस्वत, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल इन्द्रजीत सिंह चड्ढा, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल कृष्ण कुमार, श्रीमती पूजा सैनी, एडीआर सेंटर के कनिष्ठ लिपिक मनोज कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के डाटा एंट्री ऑपरेटर राहुल कुमार एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अरूणी सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

















