• Home
  • Delhi
  • 1992 से अब तक राज्यसभा में पेंडिंग हैं 19 बिल, सबसे पुराना कौन सा?
Image

1992 से अब तक राज्यसभा में पेंडिंग हैं 19 बिल, सबसे पुराना कौन सा?

नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
राज्यसभा देश की संसद का स्थायी सदन है, इसलिए यहां लंबित विधेयक लोकसभा की तरह सदन भंग होने पर समाप्त नहीं होते। यही कारण है कि वर्तमान में राज्यसभा में कुल 19 विधेयक (बिल) पेंडिंग हैं, जिनमें से कुछ तीन दशक से भी अधिक समय से अटके हुए हैं। इन लंबित विधेयकों में सबसे पुराना बिल वर्ष 1992 का है, जो जनसंख्या नियंत्रण से जुड़ा हुआ है।

राज्यसभा में बिल क्यों रहते हैं पेंडिंग?

राज्यसभा कभी भंग नहीं होती। इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में सेवानिवृत्त होते हैं, लेकिन सदन लगातार बना रहता है। इसके विपरीत लोकसभा के भंग होने पर वहां लंबित सभी विधेयक स्वतः समाप्त हो जाते हैं। यही वजह है कि राज्यसभा में कई बिल वर्षों तक लंबित रह जाते हैं।

सबसे पुराना पेंडिंग बिल: जनसंख्या नियंत्रण से जुड़ा प्रस्ताव

राज्यसभा में लंबित सबसे पुराना विधेयक संविधान (उन्नासीवां संशोधन) बिल, 1992 है।
इस बिल में राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों में संशोधन का प्रस्ताव था, ताकि जनसंख्या नियंत्रण और छोटे परिवार के नियम को बढ़ावा दिया जा सके।
बिल में यह भी सुझाव दिया गया था कि छोटे परिवार के नियम को मौलिक कर्तव्यों में शामिल किया जाए और जिन सांसदों या विधायकों के दो से अधिक बच्चे हों, उन्हें अयोग्य घोषित किया जाए। हालांकि यह प्रस्ताव कभी कानून का रूप नहीं ले सका।

अन्य प्रमुख पेंडिंग बिल

राज्यसभा में लंबित विधेयकों में दिल्ली किराया (संशोधन) बिल, 1997 भी शामिल है। इसका उद्देश्य दिल्ली किराया अधिनियम, 1995 में बदलाव कर किराया नियंत्रण कानूनों को आधुनिक बनाना था। लेकिन इसे किराएदारों और मकान मालिकों, दोनों के विरोध का सामना करना पड़ा।

इसी तरह बीज बिल, 2004 भी अब तक पेंडिंग है। इस बिल का मकसद बीजों की गुणवत्ता को नियंत्रित करना और बेहतर बीजों के उत्पादन व आपूर्ति को प्रोत्साहित करना था। खास बात यह है कि सरकार अब एक नया बीज बिल 2025 लाने की तैयारी कर रही है।

श्रम और सामाजिक न्याय से जुड़े विधेयक

अंतर-राज्य प्रवासी कामगार (रोजगार और सेवा शर्तों का विनियमन) संशोधन बिल, 2011 भी अब तक पारित नहीं हो सका है। यह बिल उस समय पेश किया गया था, जब मल्लिकार्जुन खरगे श्रम मंत्री थे।

मनमोहन सिंह सरकार के दौर के पेंडिंग बिल

UPA-2 सरकार के दौरान पेश किए गए कई बिल आज भी लंबित हैं। इनमें

  • बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स रिलेटेड लॉज़ (संशोधन) बिल, 2013
  • एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंजेस (कंपलसरी नोटिफिकेशन ऑफ वैकेंसीज़) संशोधन बिल, 2013
  • अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रतिनिधित्व पुनर्समायोजन (थर्ड) बिल, 2013
    शामिल हैं।
NDA सरकार के दौरान पेश किए गए बिल

NDA सरकार के कार्यकाल में पेश किए गए पेंडिंग बिलों में संविधान (125वां संशोधन) बिल, 2019 प्रमुख है। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में स्वायत्त परिषदों को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देना था। इसके अलावा एनआरआई विवाह पंजीकरण बिल, 2019 भी अभी तक लंबित है।


राज्यसभा में दशकों से लंबित ये विधेयक न केवल संसदीय प्रक्रिया की जटिलताओं को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि कानून बनने का सफर कई बार कितना लंबा हो सकता है।

Releated Posts

तय समय पर उद्योग नहीं लगाने वाली 8 कंपनियों की जमीन रद्द, डिफेंस कॉरिडोर में नए निवेशकों को मिलेगा मौका

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :यूपीडा की सख्त कार्रवाई, अलीगढ़ नोड सबसे अधिक प्रभावित; 414.25 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश…

ByByHindustan Mirror News Jul 28, 2026

दिल्ली की ‘लक्ष्मी योजना’ को कैबिनेट की मंजूरी, पात्र महिलाओं को हर महीने मिलेंगे ₹2500

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :1 अगस्त से शुरू होगा पंजीकरण, रक्षाबंधन पर खाते में पहुंचेगी पहली किस्त; 21 से…

ByByHindustan Mirror News Jul 28, 2026

संसद में प्रियंका गांधी ने पूछा: “क्या छात्र आतंकवादी थे, पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?”

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :एंटी पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान सरकार से जवाब मांगा, शिक्षा व्यवस्था, NTA…

ByByHindustan Mirror News Jul 28, 2026

चोट, पीलिया और सर्जरी को मात देकर राजा मुतुपंडि ने जीता CWG सिल्वर

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ : 8 साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में दमदार वापसी, 286 किलोग्राम वजन उठाकर देश का…

ByByHindustan Mirror News Jul 27, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top