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उत्तर प्रदेश खाद्यान्न घोटाला: एक आधार कार्ड पर 90-100 लोगों को बांटा गया राशन

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ बुधवार 28 मई 2025

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बरेली, आगरा और मेरठ मंडलों में वर्षों से चल रहे बहुचर्चित खाद्यान्न घोटाले की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं। इस मामले की जांच कर रही अपराध जांच विभाग (CID) ने सनसनीखेज खुलासे करते हुए घोटाले के पीछे एक संगठित और सुनियोजित साजिश की बात कही है। CID ने अपनी चार्जशीट में इस बात की पुष्टि की है कि राशन डीलरों से लेकर जिलापूर्ति अधिकारी (DSO) और एडीएम स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से यह गबन अंजाम दिया गया।

90-100 लोगों को एक आधार कार्ड पर बांटा गया राशन

CID की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि एक-एक आधार कार्ड पर 90 से 100 लोगों को राशन बांटा गया। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में नाबालिग बच्चों को भी फर्जी लाभार्थी बनाकर गरीबों का राशन हड़प लिया गया। यह गड़बड़ी वर्ष 2015 से 2018 के बीच हुई, जिसकी पहली बार जानकारी 2018 में सामने आई थी।

अधिकारियों की मिलीभगत से हुई घोटालेबाज़ी

चार्जशीट के मुताबिक, राशन डीलरों ने DSO, खाद्य निरीक्षकों, सेल्समैन, कंप्यूटर ऑपरेटरों और यहां तक कि कुछ एडीएम स्तर के अधिकारियों की मदद से पात्र लाभार्थियों के आधार नंबरों को एडिट किया। इसके बाद अपात्र व्यक्तियों के नाम से राशन जारी किया गया, जो पूरी तरह से फर्जीवाड़ा था।

134 मुकदमे, CID ने 110 का किया निस्तारण

2018 में मामले की जांच पहले आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपी गई थी, लेकिन 5 वर्षों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। अंततः फरवरी 2024 में यह जांच CID को सौंप दी गई। CID ने अब तक 110 मुकदमों का निस्तारण कर दिया है और कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।

मेरठ के तत्कालीन DSO पर गिरी गाज

CID की जांच में मेरठ के तत्कालीन जिलापूर्ति अधिकारी (DSO) विकास गौतम की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करते हुए कच्चा चिट्ठा पेश किया है। इसके साथ ही अन्य मंडलों के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चार्जशीट में नामजद किया गया है।

कैसे हुई धांधली?

  • आधार कार्ड में छेड़छाड़: पात्र लाभार्थियों के आधार कार्ड से छेड़छाड़ की गई।
  • फर्जी राशन जारी: एडिट किए गए आधार कार्ड से फर्जी लोगों को राशन बांटा गया।
  • नाबालिगों का उपयोग: छोटे बच्चों को भी लाभार्थी दिखाकर राशन उठाया गया।
  • सिस्टम में मिलीभगत: डीलर, कंप्यूटर ऑपरेटर और उच्च अधिकारी सब शामिल पाए गए।

एल-1 तकनीक से बंद होगी फर्जीवाड़े की राह

इस पूरे प्रकरण के बाद उत्तर प्रदेश सरकार हरकत में आ गई है। प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद विभाग, रणवीर प्रसाद ने कहा है कि राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए नई तकनीक लागू की जा रही है। इसके तहत ई-पॉश मशीनों में एल-1 बायोमैट्रिक तकनीक लागू की जाएगी, जिसमें अंगूठे का वास्तविक फिंगरप्रिंट ही स्वीकार होगा।
एल-1 तकनीक अंगूठे की नकल को असंभव बनाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि 30 जून 2025 तक सभी राशन दुकानों पर यह तकनीक लागू कर दी जाए।

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