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यूपी के 10 हजार प्राइमरी स्कूलों को जल्द मिलेगा पर्याप्त शिक्षक

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ 25 मई : 2025

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 10,000 से अधिक प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक की कमी दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में लगभग 1700 से अधिक विद्यालय ऐसे हैं जिनमें नियमित शिक्षक नहीं हैं। इन विद्यालयों में फिलहाल पास के शिक्षामित्र या अनुदेशक तैनात कर पढ़ाई कराई जा रही है, लेकिन इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।

बेसिक शिक्षा विभाग ने आठ साल बाद सामान्य तबादले की प्रक्रिया शुरू की है, जिसका उद्देश्य शिक्षकविहीन और एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में अधिक शिक्षकों वाले विद्यालयों से संतुलन बनाना है। इसका मतलब यह है कि जहां शिक्षक अधिक हैं, वहां से शिक्षकों को उन स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा जहां शिक्षक कम हैं।

विभाग की यह रणनीति पूरी तरह से छात्र संख्या पर आधारित है। यू-डायस पोर्टल पर छात्र संख्या के आधार पर आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के मानकों के मुताबिक तबादले किए जाएंगे। इस तरह, शिक्षकों का बेहतर वितरण सुनिश्चित होगा जिससे शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर होगा और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होगा।

  • विभाग ने यह भी निर्देश जारी किए हैं कि आवश्यकता से अधिक शिक्षक वाले स्कूलों और जिलों को चिन्हित किया जाएगा।
  • इस सूचना को ऑनलाइन पोर्टल पर जारी किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
  • शिक्षक अपनी इच्छा अनुसार 10 प्राथमिकता वाले विकल्प देंगे।
  • तबादला शिक्षक की स्वेच्छा से ही किया जाएगा और शिक्षक को उनकी प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा।
  • जो शिक्षक सामान्य तबादले में जाएंगे, उनकी वरिष्ठता सूची में स्थिति सबसे नीचे होगी, जिससे कई शिक्षक तबादला लेने में हिचकिचा सकते हैं।

पिछले साल यानी 2023 में, एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले की प्रक्रिया में 16614 शिक्षकों को तबादले का अवसर मिला था। विभाग इस बार भी गर्मी की छुट्टियों में सामान्य तबादले की प्रक्रिया पूरी करना चाहता है।

शासन ने सामान्य तबादले का आदेश जारी कर दिया है, जो वर्तमान में चल रही परस्पर तबादले की प्रक्रिया पर भी प्रभाव डालेगा। शिक्षक नेता निर्भय सिंह के अनुसार, अगर कोई शिक्षक परस्पर तबादले के तहत किसी जिले में जाता है और वहां पहले से शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है, तो उसे सामान्य तबादले के तहत फिर से कहीं और भेजा जा सकता है।

बेसिक शिक्षा विभाग की इस पहल से प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की पठन-पाठन व्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार होने से बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी और शिक्षकों के उचित आवंटन से शिक्षा की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।

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