हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ 20 मई : 2025
आगरा: किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। 15 साल से लंबित भूमि अधिग्रहण मुआवजे के मामले में आगरा के रहनकलां और रायपुर गांव के किसानों के बैंक खातों में आखिरकार करोड़ों रुपये पहुंचने लगे हैं। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) द्वारा 2009-10 में अधिगृहीत 442 हेक्टेयर भूमि का मुआवजा अब धीरे-धीरे किसानों को वितरित किया जा रहा है।
पिछले एक महीने में करीब 100 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं, जबकि 400 करोड़ रुपये और जल्द ही बांटे जाएंगे। यह राहत किसानों के लिए बड़ी उम्मीद लेकर आई है, जो मुआवजा न मिलने की वजह से लंबे समय से परेशान थे।
क्या है मामला?
एडीए ने 2009-10 में रहनकलां व रायपुर गांव की भूमि अधिग्रहित की थी, लेकिन मुआवजा न मिलने की वजह से किसानों ने जमीन पर कब्जा नहीं छोड़ने दिया। राजस्व अभिलेखों में तो एडीए का नाम दर्ज हो गया था, लेकिन किसानों को मुआवजा नहीं मिला। यह लंबित विवाद कई सालों तक चला, जिससे किसानों की परेशानियां बढ़ती रहीं।
इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ के दौरान कैबिनेट बैठक में आदेश दिए कि प्रभावित किसानों को तुरंत मुआवजा वितरित किया जाए। इसके बाद एडीए ने लगभग 300 करोड़ रुपये जिला भूमि अध्याप्ति कार्यालय में जमा कराए ताकि किसानों को मुआवजा बांटा जा सके।
एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली के मुताबिक, अब तक करीब 100 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं और जुलाई तक सभी किसानों को मुआवजा मिल जाएगा।
मुआवजा वितरण के बाद अब एडीए भूमि पर अपना भौतिक कब्जा भी लेगा। इसके बाद यहां ग्रेटर आगरा के विकास की योजना पर काम शुरू होगा। वर्तमान में एडीए ककुआ और भांडई में नई टाउनशिप विकसित कर रहा है, वहीं इनर रिंग रोड के पास रहनकलां में आवासीय परियोजना तैयार करने की योजना है।
यह परियोजना पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित की जाएगी, जिसमें निजी निवेशकों के साथ मिलकर आधुनिक आवासीय सुविधाएं बनाई जाएंगी। इससे आगरा के विकास में नया मुकाम स्थापित होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
हालांकि किसानों का कहना है कि मुआवजा अभी भी 15 साल पुरानी सर्किल रेट पर बांटा जा रहा है, जबकि जमीन की कीमत अब लगभग चार गुना बढ़ चुकी है। उनका मानना है कि मुआवजा दर में समायोजन किया जाना चाहिए था ताकि वे वर्तमान बाजार दर के अनुसार लाभान्वित हो सकें।
फिर भी, लंबित राशि मिलने के बाद किसानों में एक उम्मीद की किरण जरूर जगी है और वे अब बेहतर भविष्य की ओर देख रहे हैं।

















