हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर हालिया घटनाक्रम में Donald Trump का रुख चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने सहयोगी देशों को खुद आगे बढ़ने की सलाह दी, जबकि अमेरिका खुद सीमित भूमिका में नजर आ रहा है। इसके पीछे कई रणनीतिक और आर्थिक कारण सामने आ रहे हैं।
1. लंबी जंग से बचने की कोशिश
अमेरिका इस संघर्ष को लंबा नहीं खींचना चाहता। अब तक करीब 35 बिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं, और लंबी जंग से आर्थिक बोझ और वैश्विक दबाव बढ़ सकता है। इसलिए ट्रंप प्रशासन जल्द परिणाम लेकर पीछे हटने की रणनीति अपना रहा है।
2. होर्मुज पर नियंत्रण बेहद कठिन
होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण आसान नहीं है। यहां ईरान की मजबूत सैन्य मौजूदगी है और समुद्री रास्ता बेहद संकरा है। किसी बड़े ऑपरेशन से युद्ध का दायरा बढ़ सकता है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है।
3. अमेरिका के लिए कम अहम तेल मार्ग
अमेरिका को इस मार्ग से केवल लगभग 1% तेल मिलता है, जबकि यूरोप और एशिया के देशों के लिए यह बेहद जरूरी है। इसी कारण अमेरिका इस जोखिम में सीधे कूदने से बच रहा है।
4. सहयोगियों का सीमित समर्थन
जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान और कनाडा जैसे देशों ने सैन्य मदद देने से दूरी बनाई है। United Kingdom का नाम लेते हुए ट्रंप ने आलोचना भी की, लेकिन वास्तविकता यह है कि बिना मजबूत सहयोग के अमेरिका अकेले कदम उठाने से हिचक रहा है।
5. मिडिल ईस्ट में ठिकानों पर खतरा
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के हमलों का खतरा बढ़ गया है। रडार सिस्टम और एयरबेस को नुकसान पहुंचने की खबरें इस जोखिम को और गंभीर बनाती हैं। ऐसे में अमेरिका अपने सैनिकों को खतरे में नहीं डालना चाहता।
6. ट्रंप का दावा- मिशन पूरा
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपने प्रमुख लक्ष्य हासिल कर चुका है। अब वह ईरान के साथ समझौते की संभावना भी खुली रख रहा है, हालांकि चेतावनी भी दी है कि जरूरत पड़ी तो हमले और तेज होंगे।
होर्मुज संकट में अमेरिका का पीछे हटना कमजोरी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। सीमित जोखिम, आर्थिक बचत और कूटनीतिक दबाव के जरिए अमेरिका संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
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