• Home
  • Delhi
  • ट्रंप का ‘ऑपरेशन शॉक’: ईरान के अहम ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक
Image

ट्रंप का ‘ऑपरेशन शॉक’: ईरान के अहम ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :

दक्षिणी ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हमले; बंदर अब्बास को मुख्य भूमि से अलग करने की कोशिश, जवाबी कार्रवाई की तैयारी में ईरान।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब नए और अधिक गंभीर चरण में पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में पुल, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, पावर स्टेशन, संचार नेटवर्क और बिजली ग्रिड को निशाना बनाया गया। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह बंदर अब्बास को देश के आंतरिक हिस्सों से अलग करना और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में उसकी सैन्य एवं रसद क्षमता को कमजोर करना है।

बताया जा रहा है कि अमेरिकी कार्रवाई के दौरान होर्मुजगान प्रांत के कई प्रमुख पुल क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें बंदर अब्बास को लार, शिराज और आसपास के इलाकों से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण पुल शामिल हैं। इसके अलावा बंदर खमीर क्षेत्र के वैकल्पिक मार्गों को भी निशाना बनाया गया, जिससे सड़क संपर्क गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है।

हमलों का असर केवल परिवहन व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। बंदर अब्बास रेलवे स्टेशन, चाबहार के कंट्रोल टावर, किश द्वीप के पावर स्टेशन, बुशहर के सैन्य ठिकानों और कई बिजली सब-स्टेशनों पर भी हमले किए गए। इसके बाद दक्षिणी ईरान के अनेक क्षेत्रों में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली ग्रिड को नुकसान पहुंचने से रडार, कमांड सेंटर और सैन्य संचार व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा समुद्री व्यापारिक केंद्र होने के साथ-साथ होर्मुज क्षेत्र में सैन्य आपूर्ति का प्रमुख आधार भी है। यहां से आवश्यक सैन्य उपकरण, ईंधन और रसद विभिन्न द्वीपों और नौसैनिक ठिकानों तक पहुंचाई जाती है। ऐसे में इस क्षेत्र को निशाना बनाकर अमेरिका ईरान की सामरिक क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।

दूसरी ओर, ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह पीछे हटने के मूड में नहीं है। तेहरान का दावा है कि वह सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर जवाब देने की तैयारी कर रहा है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा, जबकि अमेरिकी पक्ष का दावा है कि उसका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि तेहरान आगे सैन्य जवाब देता है या कूटनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाता है।

Releated Posts

तीन दिन, 15 वन-टू-वन बैठकें और दुनिया ने देखी ‘मोदी डिप्लोमेसी’

नई दिल्ली घोषणापत्र पर बनी सहमति, आतंकवाद से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक साझा रुख; भारत-चीन संबंधों में…

ByByHindustan Mirror News Sep 13, 2026

एक फ्रेम में मोदी-पुतिन और जिनपिंग, ब्रिक्स में दिखी ‘केमिस्ट्री’

साझा सहमति बनाने में भारत की अहम भूमिका, घंटों चली मैराथन बातचीत के बाद बनी सहमति नई दिल्ली,…

ByByHindustan Mirror News Sep 12, 2026

ईरान से दोस्ती, खाड़ी देशों से साझेदारी; BRICS में दिखी भारत की संतुलित कूटनीति

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच मोदी-पेजेश्कियान मुलाकात से चाबहार और INSTC पर नजर, अमेरिका-इजरायल के साथ भी…

ByByHindustan Mirror News Sep 12, 2026

ब्रिक्स के मंच से पुतिन का G7 पर तंज, बोले- हम 40 फीसदी हैं, वे हमसे कम

रूसी राष्ट्रपति ने कहा- दुनिया बदल रही है, नए ग्रोथ इंजन बन रहे; ब्रिक्स कारोबार और साझेदारी का…

ByByHindustan Mirror News Sep 11, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *